3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लखनऊ के डॉक्टर ने ठेके पर किया था, कैंसर मरीज का ऑपरेशन, जानिए फिर क्या हुआ

जांच शुरू होते ही खुली निजी अस्पताल की पोल, उप मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, ठेके पर बुलाए गए थे डॉक्टर। स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही हैं जांच।

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Ritesh Singh

Feb 25, 2023

कैंसर मरीज दलाल के चक्कर में फसा

कैंसर मरीज दलाल के चक्कर में फसा

स्वास्थ्य विभाग की निजी अस्पतालों पर मेहरबानी मरीजों के लिए भारी पड़ रही है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आदेश पर जांच शुरू हो गई है। जिसमें पता चला है कि मड़ियांव स्थित निजी अस्पताल में कैंसर मरीज के जबड़े का ऑपरेशन ठेके पर डॉक्टर को बुलाकर कराया गया। इधर, शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।

यह भी पढ़ें: सीएम योगी के पास है क्या अखिलेश का जवाब, आज विधानसभा में देखना होगा

ठेके पर बुलाए गए थे डॉक्टर

अस्पताल के पंजीकरण के तहत जमा डॉक्टरों की सूची व उसके रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। अफसरों का कहना है कि पैनल में जिन डॉक्टरों के नाम दिए थे उसमें कैंसर विशेषज्ञ शामिल है या नहीं। इसकी पड़ताल की जाएगी। ठेके पर डॉक्टर बुलाकर ऑपरेशन कराए जाने पर अस्पताल को नोटिस दी जाएगी।

यह भी पढ़ें: जानिए किसके कहने पर बाबा रामदेव ने की लखनऊ मेट्रो की सवारी, यात्रियों के सामने क्या बोल दिया

कैंसर मरीज दलाल के चक्कर में फसा

सीतापुर के मिश्रिख निवासी श्यामू (55) के जबड़े में गांठ थी। परिवारीजन दलालों के चंगुल में फंस गए थ। मरीज को लेकर मड़ियांव के निजी अस्पताल में लेकर आ गए। परिवारजनों का आरोप है कि चार लाख रुपये लेने के बाद 80 हजार की मांग की गई। अस्पताल प्रशासन ने मरीज को बंधक बना दिया। डिप्टी सीएम के हस्तक्षेप के बाद मरीज अस्पताल के चंगुल से छूट सका। स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच कर रहा है।

यह भी पढ़ें: बिछुइया गांव में चूल्हे की चिंगारी से, आग का तांडव, 86 मकान जलकर हुए खाक

1200 प्राइवेट अस्पताल मरीजों की जान डालते है खतरे में

शहर में करीब 1200 प्राइवेट अस्पताल हैं। इसमें ज्यादातर ठेके पर डॉक्टरों को बुलाकर गंभीर बीमारियों का इलाज मरीजों को मुहैया कराया जा रहा है। ऑपरेशन के बाद मरीजों को कौन देखता है? इसकी जानकारी किसी को नहीं दी जाती है। ऐसे में गंभीर मरीजों की जान खतरे में रहती है।