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Tulsi Vivah 2021: तुलसी विवाह आज जानिए मुहूर्त और विवाह की विधि

- तुलसी विवाह शुभ माना जाता है। शालिग्राम के साथ तुलसी का विवाह कराने वाले व्यक्ति के जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। और उस पर भगवान हरि की विशेष कृपा होती है। तुलसी विवाह को कन्यादान जितना पुण्य कार्य माना जाता है।

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Tulsi Vivah 2021: तुलसी विवाह आज जानिए मुहूर्त और विवाह की विधि

Tulsi Vivah 2021: तुलसी विवाह आज जानिए मुहूर्त और विवाह की विधि

लखनऊ. Tulsi Vivah 2021 तुलसी विवाह आज पूरे प्रदेश में मनाया जा रहा है। देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का विशेष महत्व बताया गया है। तुलसी विवाह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष में एकादशी के दिन होता है। कहा जाता है कि, इस दिन भगवान विष्णु चार माह की लंबी निद्रा के बाद जागते हैं और इसके साथ ही सारे शुभ मुहूर्त खुल जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम का विवाह तुलसी से कराया जाता है। आइए जानते हैं विवाह की आसान विधि, मुहूर्त और सामग्री।

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लखनऊ के राजाजीपुरम निवासी ज्योतिष अजय श्रीवास्तव ने बताया कि, तुलसी विवाह शाम होता है। तुलसी के गमले पर गन्ने का मंडप बनाकर तुलसी पर लाल चुनरी, सुहाग सामग्री चढ़ानी चाहिए। शालिग्रामजी को गमले में रखकर रस्में शुरू करें। और विवाह में जिन नियमोें का पाल किया जाता है, उनका पालन करें।

तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त :- ज्योतिष अजय श्रीवास्तव ने बताया कि, तुलसी विवाह मुहूर्त 15 नवंबर 2021, दोपहर 1.02 से दोपहर 2.44 तक। 15 नवंबर 2021 शाम 5.17 से 5.41 तक।

तुलसी विवाह की विधि :-

- स्नान कर साफ कपड़े पहनें
- आज व्रत रखें।
- शुभ मुहूर्त में तुलसी मां को स्थापित करें।
- फिर शालिग्राम को स्थापित करें।
- चौकी पर अष्टदल कमल बनाकर कलश स्थापित करें।
- कलश पर स्वास्तिक बनाएं।
- आम के पांच पत्ते रखें।
- कपड़े में नारियल लपेटकर कलश पर रखें।
- तुलसी के गमले पर गेरू लगाएं।
- रंगोली बनाएं, घी का दीपक जलाएं।
- शालिग्राम की चौकी की दाएं तरफ तुलसी का गमला रखें।
- सुहाग का प्रतीक लाल चुनरी चढ़ाएं।
- दुल्हन की तरह श्रृंगार करें।
- शालिग्राम जी को पीले वस्त्र पहनाएं।
- गणेश जी की पूजा करें।
- तुलसी-शालिग्राम को धूप, दीप, फूल, वस्त्र, माला अर्पित करें।
- तुलसी मंगाष्टक का पाठ करें।
- शालिग्रामजी को लेकर तुलसीजी की सात बार परिक्रमा करें।

तुलसी मंत्र :-

‘महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते’
इस मंत्र का जाप नियमित रूप से तुलसी पत्ते या पौधे को छूते हुए करना चाहिए.

स्तुति मंत्र :-

1. देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।

2. तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।