
Lucknow: Uttar Pradesh Assembly Speaker Satish Mahana conducts the proceeding of the house during the Budget Session of the Uttar Pradesh Assembly at Vidhan Bhawan, in Lucknow, on Tuesday, February 17, 2026. (Photo: IANS)
यूपी विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सदन की कार्यवाही के दौरान भावुक नजर आए। उन्होंने मंगलवार को सदन में हुए घटनाक्रम पर दुख जताते हुए कहा कि उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक यात्रा अब अंतिम चरण में है। ऐसे में उन्हें गंभीरता से यह विचार करना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप में पिछले साढ़े चार वर्षों में जो कुछ किया, वह सही था या नहीं।
कार्यवाही शुरू होने पर सतीश महाना ने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन भाषा और आचरण की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को जो घटनाक्रम हुआ, उससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा।
महाना ने कहा कि उन्हें पहली बार लगा कि या तो उनके प्रयासों में कहीं कमी रह गई या फिर डॉ. भीमराव अंबेडकर की वह बात सही साबित हो रही है कि कमी संविधान में नहीं, बल्कि उसे संचालित करने वाले व्यक्तियों में होती है। उन्होंने कहा कि मैं इस बात पर भी आत्मचिंतन करूंगा कि क्या मैं इस कुर्सी के योग्य हूं। जल्द ही इस संबंध में निर्णय लूंगा। सतीश महाना ने कहा कि विधानसभा और जनप्रतिनिधियों की सकारात्मक छवि बनाने के लिए लगातार प्रयास किए गए। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार की आलोचना और जनहित के मुद्दे उठाने की होती है, न कि सदन की गरिमा को प्रभावित करने की। अब तक विपक्ष ने अपनी बात रखने की लोकतांत्रिक परंपरा का पालन किया, लेकिन मंगलवार का घटनाक्रम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा।
विधानसभा अध्यक्ष ने बिना किसी सदस्य का नाम लिए कहा कि एक ऐसे विधायक के व्यवहार से उन्हें सबसे अधिक पीड़ा हुई, जिन्हें वह सदन का 'रोल मॉडल' मानते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मना करने के बावजूद सदन के बाहर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह निराशाजनक था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कार्यवाही की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करना भी सदन की परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
महाना ने सभी दलों के सदस्यों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आत्ममंथन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विधायकों को यह भी सोचना चाहिए कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी संसदीय परंपराएं छोड़कर जा रहे हैं।
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने विधानसभा अध्यक्ष से सपा विधायक सचिन यादव के निलंबन पर पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी नियम के तहत चर्चा की अनुमति दे दी जाती तो स्थिति सामान्य हो सकती थी। वहीं सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने कहा कि विपक्ष किसानों और छात्रों से जुड़े मुद्दे उठाना चाहता है तथा उसे अध्यक्ष की निष्पक्षता और संरक्षण पर भरोसा है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने जवाब में कहा कि वह विपक्ष की बात सुनने के लिए पूरी तरह तैयार थे और कई बार अवसर भी दिया गया, लेकिन हंगामे के कारण पूरा दिन व्यर्थ चला गया। सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की समान जिम्मेदारी है।
बुधवार को अध्यक्ष की नसीहत के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने फिर से नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान के कथित विवाद पर चर्चा की मांग कर रहा था। लगातार शोर-शराबे के कारण अध्यक्ष ने पहले कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित की। दोबारा बैठक शुरू होने पर भी गतिरोध जारी रहने से सदन को दोपहर एक बजे तक स्थगित करना पड़ा।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया और उसका उद्देश्य केवल सदन की कार्यवाही बाधित करना था। राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर भी उन्होंने सपा की आलोचना की। कहा कि पार्टी को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका राजनीतिक परिणाम भुगतना पड़ेगा।
खबर अपडेट हो रही है..
Updated on:
05 Aug 2026 02:06 pm
Published on:
05 Aug 2026 01:47 pm
