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चुनाव सिर पर, लेकिन यूपी BJP का संगठन अधूरा, मोर्चों और जिला प्रभारियों की नियुक्तियां अटकने से पार्टी में बढ़ी टेंशन

UP BJP Organization Appointments Delayed: उत्तर प्रदेश भाजपा में संगठन के दूसरे चरण की नियुक्तियां एक महीने बाद भी अटकी हुई हैं। विधानसभा चुनाव करीब होने के बावजूद मोर्चों और क्षेत्रीय समितियों के गठन में हो रही देरी से पार्टी में चिंता बढ़ती जा रही है। राज्य के विधानसभा चुनाव में अब महज सात महीनों का ही समय रह गया है।
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लखनऊ

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Mohsina Bano

Aug 04, 2026

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यूपी विधानसभा चुनाव 2027 (फोटो: पत्रिका)

UP Assembly Election 2027:उत्तर प्रदेश बीजेपी में संगठन के दूसरे चरण का पुनर्गठन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। यूपी भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई के पुनर्गठन को एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन संगठन के दूसरे चरण की नियुक्तियों में लगातार देरी हो रही है। राज्य के विधानसभा चुनाव में अब करीब 7 महीने का ही वक्त बचा है। ऐसे में नई संगठनात्मक टीम के अगले चरण का काम जल्द पूरा होता नहीं दिख रहा है जिससे पार्टी के भीतर बेचैनी और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

चुनाव की तैयारियों पर पड़ रहा असर

बीजेपी की यूपी की नई टीम की घोषणा जून के अंत में की गई थी। इसमें जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक अनुभव का खास ध्यान रखा गया था। अब दूसरे चरण में क्षेत्रीय समितियों, पार्टी के मोर्चों और जिला प्रभारियों की नियुक्तियां होनी हैं। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से ये नियुक्तियां बेहद अहम हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि निचले स्तर पर जल्द नियुक्तियां न होने से जमीनी स्तर की रणनीति को लागू करने की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है।

संगठन की मजबूत कड़ी हैं मोर्चे और प्रभारी

पार्टी सूत्रों के अनुसार युवा, महिला, किसान, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक सहित विभिन्न मोर्चे जमीनी स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यही संगठन सदस्यता अभियान चलाते हैं, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखते हैं और चुनाव के समय बूथ स्तर तक पार्टी की रणनीति को लागू करने का काम करते हैं। इसलिए इन नियुक्तियों को विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार संगठन के निचले स्तर पर पदाधिकारी नहीं बनने से कई जिलों में पार्टी की योजनाओं को गति नहीं मिल पा रही है। जिला प्रभारी भी अभी तय नहीं हुए हैं। जिला प्रभारी राज्य नेतृत्व और जिला इकाइयों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी निभाते हैं। वे संगठनात्मक कार्यक्रमों की निगरानी करते हैं और समय समय पर प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट भी भेजते हैं।

बदलती राजनीतिक रणनीति भी है देरी की वजह

सूत्रों की मानें तो पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि क्षेत्रीय समितियों और सहयोगी संगठनों का गठन पूरी तरह से एक बड़ी सोशल इंजीनियरिंग रणनीति पर आधारित हो। बीजेपी नेतृत्व विभिन्न जाति समूहों, क्षेत्रों और वैचारिक गुटों को उचित प्रतिनिधित्व देना चाहता है। संगठन के पुनर्गठन को पार्टी की बदलती राजनीतिक रणनीति के साथ जोड़ने की यह कोशिश भी इस देरी का एक बड़ा कारण है। बीजेपी ने अपने अभियानों की रूपरेखा को नए सिरे से तैयार करना शुरू कर दिया है। अब पार्टी का पूरा फोकस सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने, कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार करने, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और गैर पारंपरिक सामाजिक समूहों तक अपनी पैठ मजबूत करने पर है।