
डिप्टी CM ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर कसा तंज। फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज
UP Politics: उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की दादरी में हुई जनसभा को फ्लॉप शो करार दिया। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख भले ही कितने भी प्रयास कर लें, जनता उनके कार्यकाल को भूली नहीं है। इसीलिए, यूपी में अखिलेश यादव की दाल नहीं गलेगी।
डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने दावा किया कि सपा प्रमुख का दादरी दौरा पूर्ण रूप से फ्लॉप रहा है। उनकी जनसभा की खाली कुर्सियां गवाह है कि उनकी रैली फ्लॉप रही। 100 विधानसभा के कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करने के बावजूद जनसभा में कुर्सियां खाली रह गईं। अखिलेश यादव का एक ही विजन, एक ही लक्ष्य है गुंडाराज, भ्रष्टाचार और जातिवाद के वही पुराने हथकंडों से सत्ता पाना। सपा का PDA केवल परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी है।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के भय और आतंक के पुनर्जागरण हेतु दादरी रैली ही नहीं कितनी भी रैलियां कर लें, कितने भी रंग बदल लें, लेकिन गुंडाराज, भ्रष्टाचार और परिवारवाद का समय कब का समाप्त हो चुका है। इनकी रैलियां सिर्फ नाम की हैं, न इनका जनता से सरोकार है और न जनता का इनसे कोई सरोकार है। जनता सपा के कारनामों को भूली नहीं है। दंगों की आग में न जाने कितने बेटे अनाथ हो गए, कितनी माताओं की गोद सूनी हो गई। बेटियां असुरक्षित थी, बेटों का अधिकार छीना जाता था। लूट, अपहरण के उस अंधकार के युग को जनता कभी भूल नहीं सकती और न ही इन्हें माफ करने वाली है।
डिप्टी CM पाठक ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की सरकार में सुशासन का राज है। सेवा, समर्पण, सम्मान और गरीब कल्याण की नीतियों से जनता खुशहाल है। उत्तर प्रदेश अभूतपूर्व उपलब्धियों के साथ विकास के पथ तेजी से अग्रसर है। जिस नोएडा की यह बात करते हैं, उस नोएडा के नाम से कांपते थे। अंधविश्वास के साये में विकास की मुख्यधारा से अछूते नोएडा को हमारी ही सरकार ने अंधविश्वास के अंधकार से बाहर निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। उत्तर प्रदेश में पुनः BJP तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। जनता का आशीर्वाद और विश्वास सिर्फ BJP के साथ है।
वहीं, डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी की दादरी रैली ‘सद्भावना’ नहीं, बल्कि ‘दुर्भावना’ रैली साबित हुई। यह रैली उस अराजक दौर की याद दिलाने का प्रयास थी, जब कानून-व्यवस्था सवालों के घेरे में थी, अपराधियों का मनोबल ऊंचा था और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस करता था। सपा मुखिया अखिलेश यादव की तुष्टिकरण की वही राजनीति फिर सामने आई, जिसने कभी प्रदेश को ‘अराजकता और असुरक्षा’ के दौर में धकेला था। यह रैली 2012 से 2017 के सपा शासनकाल के उस अंधेरे अध्याय को फिर से जीवित करने की कोशिश थी, जिसे प्रदेश की जनता साफ तौर पर नकार चुकी है।
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Updated on:
30 Mar 2026 12:04 pm
Published on:
30 Mar 2026 12:04 pm
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