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UP Election 2027:’सपा सरकार बनते ही शिक्षकों के हितों की होगी रक्षा’, अखिलेश यादव का बड़ा बयान

UP Election 2027 Samajwadi Party Strategy: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के शिक्षकों को लेकर एक अहम बयान देकर सियासी पारा बढ़ा दिया है।
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लखनऊ

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Aman Pandey

Jul 06, 2026

Akhilesh Yadav Big Statement

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। फोटो सोर्स-IANS

Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव एक सोची-समझी और बहुआयामी रणनीति के तहत अपनी गोटियां बिछाने में जुट गए हैं। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा अपनी चुनावी पिच तैयार कर रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव 'अयोध्या मॉडल' और 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ-साथ अब एक नए बड़े वोट बैंक यानी प्रबुद्ध/शिक्षक वर्ग को साधने की कवायद में लग गए हैं।

शिक्षकों को साधने की कवायद

चुनाव से पहले ही यूपी का सियासी पारा चढ़ाते हुए अखिलेश यादव ने शिक्षा और शिक्षक वर्ग को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखने का संकेत दिया है। पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से जारी पोस्टर के जरिए अखिलेश यादव ने एक बड़ा चुनावी वादा किया है। उन्होंने साफ किया है कि आने वाले चुनाव में शिक्षा और शिक्षक वर्ग उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रहेंगे।

अखिलेश बोले-2027 में शिक्षकों का होगा भला

अखिलेश यादव ने कहा है कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार में शिक्षकों के हित और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्य किये जाएंगे। उनका मानना है कि किसी भी राज्य की तरक्की की बुनियाद बेहतर शिक्षा तंत्र पर टिकी होती है, और जब तक शिक्षकों को उनका हक और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा।

लेकिन सपा की चुनावी बिसात यहीं तक सीमित नहीं है। शिक्षकों को साधने के साथ-साथ पार्टी अब अपने पुराने और सबसे भरोसेमंद फॉर्मूले, यानी PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) को और धार देने में जुटी है।

अब दलित वोट बैंक पर भी अखिलेश की नजर

लोकसभा चुनाव की तर्ज पर अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पीडीए को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन इस बार उनका खास जोर अपने 'अयोध्या मॉडल' पर है। सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के अहम दलित वोट बैंक को साधने के लिए सपा एक खास योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों को 14 सामान्य सीटों पर भी टिकट दिया जाएगा। इससे पार्टी के कुल आरक्षित उम्मीदवारों की संख्या कम से कम 100 तक पहुंच जाएगी। फिलहाल प्रदेश में एससी के लिए 85 और एसटी के लिए 2 सीटें आरक्षित हैं।

क्या है सपा का मकसद

पार्टी सूत्रों का कहना है कि सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारने के पीछे मकसद साफ संदेश देना है कि सपा दलितों को आगे बढ़ा रही है। मायावती के सियासी तौर पर ज्यादा सक्रिय न रहने के चलते यह वर्ग बीजेपी के पाले में खिसकता गया है। ऐसे में अखिलेश यादव 100 दलित उम्मीदवार उतारकर खुद को दलित राजनीति के नए चैंपियन के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं। पार्टी को उम्मीद है कि इस कदम से दलितों का वोट बड़ी संख्या में सपा की ओर आएगा और यही रणनीति एक बार फिर यूपी के सीएम ऑफिस तक अखिलेश की राह आसान बना सकती है।