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दवा व्यापारियों को बड़ा झटका: UP सरकार ने थोक दवा के नए लाइसेंस जारी करने पर लगाई रोक

UP Government: उत्तर प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किया है कि जब तक पुराने लाइसेंसों का पूरा सत्यापन नहीं हो जाता और मुख्यालय से नया आदेश नहीं आ जाता, तब तक कोई नया थोक दवा लाइसेंस जारी न किया जाए।
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यूपी में थोक दवा के नए लाइसेंस पर पाबंदी - फाइल फोटो

UP Govt Halts Wholesale Drug Licenses: उत्तर प्रदेश में दवा का थोक कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए बुरी खबर आई है। सरकार ने नए थोक दवा लाइसेंस देने पर तुरंत रोक लगा दी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने गुरुवार को सभी मंडलों के सहायक आयुक्तों और जिलों के औषधि निरीक्षकों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।

यूपी में थोक दवा के नए लाइसेंस पर पाबंदी

आदेश साफ है- जब तक पुराने लाइसेंसों का पूरा सत्यापन नहीं हो जाता और मुख्यालय से नया आदेश नहीं आ जाता, तब तक कोई नया थोक दवा लाइसेंस जारी न किया जाए। इस फैसले से पूरे प्रदेश के दवा व्यापारियों में खलबली मच गई है।

स्वास्थ्य विभाग का नया आदेश लागू

दरअसल, प्रदेश में नकली दवाओं का खेल काफी समय से चल रहा था। आगरा, लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद समेत कई जगहों पर बड़े-बड़े सिंडीकेट पकड़े गए। लेकिन फर्जीवाड़ा पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ। ऐसे में एफएसडीए ने सभी पुराने थोक लाइसेंसों की जांच शुरू की। 9 मार्च और 19 जून को भी सभी जिलों को पुराने लाइसेंसों का स्थलीय निरीक्षण कर सत्यापन करने के निर्देश दिए गए थे।

सरकार ने जारी किया सख्त आदेश

जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। कुछ लोगों के लाइसेंस पहले ही प्रशासनिक आधार पर रद्द हो चुके थे, फिर भी उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों के नाम पर उसी जगह या आसपास नया लाइसेंस ले लिया। कई दुकानें तो सिर्फ बिलिंग पॉइंट बनकर चल रही थीं। असली कारोबार कहीं और होता था, लेकिन कागजों पर यहां से बिल निकलता था। इससे नकली दवाओं पर नकेल कसना मुश्किल हो रहा था।

एफएसडीए आयुक्त ने इन अनियमितताओं को देखते हुए यह कदम उठाया है। अब सारे पुराने लाइसेंसों की जांच पूरी होने के बाद ही आगे का फैसला होगा। अधिकारियों को साफ निर्देश है कि इस दौरान कोई नया लाइसेंस पास न किया जाए।

योगी सरकार के फैसले से दवा बाजार में हड़कंप

दवा व्यापारी इस फैसले से काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि नए लाइसेंस के लिए पहले से तैयारी चल रही थी, निवेश हो चुका था, लेकिन अचानक रोक लगने से उनका काम अटक गया। वहीं स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि पहले जो गड़बड़ियां हैं उन्हें ठीक किए बिना नए लाइसेंस देना ठीक नहीं होगा। इससे मरीजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

नकली दवाओं के खिलाफ सरकर की मुहिम

यह फैसला नकली दवाओं के खिलाफ सरकार की मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है। देखना होगा कि पुराने लाइसेंसों की जांच कितनी जल्दी पूरी होती है और उसके बाद नए लाइसेंस की प्रक्रिया कब शुरू होती है। फिलहाल थोक दवा कारोबारियों के लिए इंतजार का समय शुरू हो गया है।