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UP में शिक्षा का डिजिटल बदलाव: ‘निपुण शिक्षक सारथी’ से 5 जिलों में बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर

UP Launches ‘NIPUN Shikshak Sarthi’ :  उत्तर प्रदेश में ‘निपुण शिक्षक सारथी’ पायलट मॉडल शुरू, पांच जिलों में शिक्षकों को तकनीक से जोड़कर कक्षा 2 के सीखने के परिणाम सुधारने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Apr 16, 2026

तकनीक से सशक्त होंगे शिक्षक: यूपी के 5 जनपदों में ‘निपुण शिक्षक सारथी’ पायलट मॉडल की शुरुआत    (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)  

तकनीक से सशक्त होंगे शिक्षक: यूपी के 5 जनपदों में ‘निपुण शिक्षक सारथी’ पायलट मॉडल की शुरुआत    (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)  

UP Launches ‘NIPUN Shikshak Sarthi’ Pilot: उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाने के लिए योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। ‘निपुण भारत मिशन’ को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से ‘निपुण शिक्षक सारथी’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। इस अभिनव पहल के तहत प्रदेश के पांच जनपदों चित्रकूट, सोनभद्र, बलरामपुर, गोरखपुर और सीतापुर में पायलट मॉडल के रूप में इसे लागू किया गया है।

यह कार्यक्रम न केवल शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि उन्हें शिक्षा प्रणाली में वास्तविक परिवर्तन का वाहक भी बनाएगा। अब शिक्षक केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया के सक्रिय मार्गदर्शक बनेंगे।

शिक्षकों की भूमिका में बड़ा बदलाव

‘निपुण शिक्षक सारथी’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की पारंपरिक भूमिका को बदलकर उन्हें तकनीक-सक्षम बनाना है। इस पहल के जरिए शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल टूल्स, प्रशिक्षण और सतत शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। इससे वे विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार पढ़ाने की नई विधियां अपनाने में सक्षम होंगे।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब शिक्षक तकनीक से जुड़ते हैं, तो उनकी कार्यक्षमता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ती हैं। इससे न केवल पढ़ाई का स्तर सुधरता है, बल्कि छात्रों की रुचि भी बढ़ती है।

पांच जनपदों में पायलट प्रोजेक्ट

इस कार्यक्रम को फिलहाल पांच जनपदों,चित्रकूट, सोनभद्र, बलरामपुर, गोरखपुर और सीतापुर में पायलट आधार पर लागू किया गया है। इनमें चित्रकूट, सोनभद्र और बलरामपुर आकांक्षी जनपदों की श्रेणी में आते हैं, जबकि गोरखपुर और सीतापुर के चयनित विकासखंडों को इसमें शामिल किया गया है।

इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया है, क्योंकि यहां शिक्षा के क्षेत्र में विशेष सुधार की आवश्यकता महसूस की गई थी। सरकार का लक्ष्य है कि इस मॉडल के सफल होने पर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाए।

15 एसआरजी देंगे निरंतर मार्गदर्शन

कार्यक्रम के तहत 15 राज्य स्तरीय संदर्भ समूह (SRG) का गठन किया गया है, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इन प्रशिक्षित विशेषज्ञों का कार्य शिक्षकों को लगातार मार्गदर्शन देना और उनकी समस्याओं का समाधान करना होगा।

15 और 16 अप्रैल को आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में इन एसआरजी को आधुनिक तकनीक, शिक्षण विधियों और संवाद प्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। अब ये विशेषज्ञ तकनीक के माध्यम से शिक्षकों से सीधे जुड़ेंगे और उन्हें नियमित रूप से सहयोग प्रदान करेंगे।

संवाद व्यवस्था में बड़ा सुधार

‘निपुण शिक्षक सारथी’ कार्यक्रम की एक खास विशेषता इसकी संवाद प्रणाली है। पहले जहां शिक्षकों को तकनीकी या शैक्षणिक सहायता के लिए सीमित अवसर मिलते थे, वहीं अब इस कार्यक्रम के तहत संवाद की आवृत्ति को कई गुना बढ़ा दिया गया है। अब शिक्षक प्रतिदिन 18 से 20 बार तक विशेषज्ञों से संपर्क कर सकेंगे और अपनी समस्याओं का तुरंत समाधान पा सकेंगे। इससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और लक्ष्य आधारित बनेगी।

कक्षा 2 पर विशेष फोकस

इस कार्यक्रम में विशेष रूप से कक्षा 2 के छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस स्तर पर भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि शुरुआती कक्षाओं में ही मजबूत आधार तैयार हो जाता है, तो आगे की पढ़ाई में छात्रों को कम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कक्षा 2 के शिक्षकों को अतिरिक्त प्रशिक्षण और सहयोग दिया जा रहा है, ताकि वे बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ा सकें।

गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा

कार्यक्रम के तहत गतिविधि आधारित और स्तर के अनुसार शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे बच्चे बिना किसी दबाव के सीख सकेंगे और उनकी समझ भी बेहतर होगी। खेल-खेल में पढ़ाई की यह पद्धति बच्चों को अधिक आकर्षित करती है और उनके समग्र विकास में सहायक होती है।

डिजिटल मॉडल से समय और लागत में बचत

‘निपुण शिक्षक सारथी’ कार्यक्रम पूरी तरह तकनीक आधारित है, जिससे फील्ड विजिट की आवश्यकता कम हो जाएगी। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी। साथ ही, दूर-दराज के क्षेत्रों में भी शिक्षकों तक नियमित रूप से पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी। यह मॉडल विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए लाभकारी साबित होगा, जहां संसाधनों की कमी है या जहां नियमित निगरानी संभव नहीं हो पाती।

कमजोर विद्यालयों को प्राथमिकता

कार्यक्रम के तहत उन विद्यालयों और शिक्षकों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां शैक्षणिक प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर है। विभिन्न आकलनों के आधार पर ऐसे स्कूलों की पहचान की गई है, ताकि उन्हें विशेष सहयोग देकर उनकी गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। इससे शिक्षा के स्तर में संतुलन आएगा और सभी क्षेत्रों के छात्रों को समान अवसर मिल सकेंगे।

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद

‘निपुण शिक्षक सारथी’ कार्यक्रम को शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह पहल न केवल शिक्षकों को सशक्त बनाएगी, बल्कि छात्रों के सीखने के परिणामों में भी सुधार लाएगी। सरकार का मानना है कि यदि शिक्षक मजबूत होंगे, तो शिक्षा व्यवस्था अपने आप मजबूत हो जाएगी। यही कारण है कि इस कार्यक्रम में शिक्षकों को केंद्र में रखा गया है।