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यूपी विधानमंडल में ढूंढे जा रहे हैं शर्मीले विधायक, इनकी चुप्पी तोड़ने के लिए दिया जाएगा मंत्र

यूपी विधानमंडल के सियासी इतिहास में पहली बार एक दिन दोनों सदनों की कार्यवाही सिर्फ महिला विधायकों के नाम रही। अब एक बार फिर यूपी विधानमंडल नई पहल करने जा रहा है।  

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यूपी विधानमंडल में ढूंढे जा रहे हैं शर्मीले विधायक, इनकी चुप्पी तोड़ने के लिए दिया जाएगा मंत्र

यूपी विधानमंडल में ढूंढे जा रहे हैं शर्मीले विधायक, इनकी चुप्पी तोड़ने के लिए दिया जाएगा मंत्र

यूपी विधानमंडल के सियासी इतिहास में पहली बार एक दिन दोनों सदनों की कार्यवाही सिर्फ महिला विधायकों के नाम रही। अब एक बार फिर यूपी विधानमंडल नई पहल करने जा रहा है। इस बार ऐसे विधायक जिन्होंने अभी तक विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही में एक भी शब्द नहीं बोला, ऐसे शर्मिले व चुप्पी साध कर सदन के कोने में बैठे रहने वाले विधायकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अफसरों को निर्देश दिया यह कि, ऐसे शर्मीले विधायकों की तलाश की जाए। उनकी लिस्ट बनाई जाए। और उनके बारे में सारा ब्योरा एकत्र किया जाए। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि, आने वाले शीतकालीन सत्र में सदन में न बोलने वाले विधायकों के एक दिन का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा।

यूपी विधानमंडल में होगी एक और नई पहल

यूपी विधानमंडल में एक और नई पहल होने जा रही है। ऐसे विधायक जिन्होंने 18वीं विधानसभा के बजट सत्र से लेकर मानसून सत्र तक चुप्पी साधे रखा, उनकी चुप्पी तोड़ने के लिए विधानसभा में एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने ऐसे सभी विधायकों का ब्योरा मांगा है जो दोनों सत्रों में एक बार भी अपनी बात नहीं रख सके हैं। ऐसे विधायकों के लिए शीतकालीन सत्र में एक विशेष सत्र रखा जाएगा।

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करीब 100 विधायक है चुप्पे

विधानसभा के सूत्रों के अनुसार, सत्ता पक्ष व विपक्ष के 100 से अधिक ऐसे विधायक हैं जिन्हें सदन में या तो बोलने का अवसर नहीं मिला या उन्होंने प्रयास ही नहीं किया। महाना का कहना है कि, ऐसे विधायकों को अवसर देने के लिए ही नई पहल की जा रही है।

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यूपी विधानमंडल ने रचा इतिहास

इस बार यूपी विधानमंडल का मॉनसून सत्र 19 सितंबर से प्रारंभ हुआ था। मॉनसून सत्र में 22 सितंबर के दिन ने एक इतिहास रच दिया है। विधानमंडल के सियासी इतिहास में पहली बार एक दिन दोनों सदनों की कार्यवाही महिला विधायकों के नाम रही इस तरह मॉनसून का यह सत्र महिला सशक्तीकरण के लिए जाना गया।

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