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UP Nagar Nikay Chunav 2023: निकाय चुनाव में कैसे तय होता है आरक्षण का फॉर्मूला, जानें योग्यता और कौन लड़ सकता है चुनाव?

UP Nagar Nikay Chunav 2023: यूपी में नगर निकाय चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। आइए जानते हैं यूपी में कितने नगर निगम,नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत हैं। इस चुनाव में लड़ने के लिए पूरी प्रक्रिया और कितनी योग्यता होनी चाहिए?

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लखनऊ

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Anand Shukla

Mar 31, 2023

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निकाय चुनाव में जुटे सभी राजनीतिक दल

उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में आरक्षण लिस्ट जारी कर दी है। इसके बाद से सभी राजनीतिक दल अपनी- अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। निकाय चुनाव लोकसभा चुनाव से पहले हो रहा था। ऐसे में यह चुनाव सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है। गुरुवार को आरक्षण लिस्ट जारी करते हुए मंत्री एके शर्मा ने कहा कि पिछली आरक्षण सूची और इसमें कोई बड़ा अंतर नहीं है।

4 महीने पहले ही यूपी में निकाय चुनाव होना था लेकिन होईकोर्ट के आदेश के बाद चुनाव पर रोक लग गई। इसके बाद सरकार ने ओबीसी कमीशन बना दिया और सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट में कमीशन ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण के साथ यूपी निकाय चुनाव कराने की इजाज़त दे दी।

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शाहजहांपुर बना है नया नगर निगम

यूपी में 17 नगर निगम हैं। इनमें आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर, शाहजहांपुर और वाराणसी शामिल हैं। शाहजहांपुर को अभी हॉल ही में नगर निगम बनाया गया है। यहां के मतदाता पहली बार मेयर के लिए वोट डालेंगे।

इसके साथ ही यूपी में कुल 199 नगर पालिका परिषद और 544 नगर पंचायतें हैं। नगर निगम में मेयर यानी महापौर और पार्षदों को चुना जाता है, जबकि नगर पालिका में अध्यक्ष और नगर पंचायतों में सभासद चुने जाते हैं।

चुनाव लड़ने की उम्र कितनी होनी चाहिए?

नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए आयोग द्वारा उम्र सीमा भी निर्धारित की गई है। इसके तहत नगर निगम के महापौर और नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार की उम्र 30 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

वहीं नगर निगम के पार्षद और नगर पालिका नगर पंचायत के सदस्यों की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए। नगर निकाय का चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी को भारत का नागरिक होना चाहिए और पर्चा दाखिला करते समय प्रत्याशी के साथ दो प्रस्तावक और दो समर्थक होने चाहिए जो उसी के संबंधित वॉर्ड के निवासी हों। इस चुनाव में वहीं के मतदाता वोट डालते हैं। इसके लिए अलग से मतदाता सूची जारी की जाती है।

कैसे होता तय होता है आरक्षण?

आरक्षण लागू करने का एक तय फार्मूला है। इसे चक्रानुक्रम फार्मूला कहा जाता है। इस फॉर्मूले के तहत कोई भी सीट सबसे पहले महिला एससी के लिए आरक्षित होती है। इससे अगली बार चरणवार तरीके से एससी के लिए, फिर अगली बार ओबीसी महिला के लिए, फिर ओबीसी, फिर महिला आरक्षित और फिर इसके अगली बार यही अनारक्षित सीट होती है।

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