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UP Nikay Chunav 2023: यूपी नगर निगम चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी किस्मत आजमा रही थी। शनिवार को सामने आए नगर निगम महापौर के नतीजे में ओवैसी की पार्टी को जनता ने इस तरह खारिज कर दिया कि एक सीट को छोड़कर बाकी सभी सीटों पर पार्टी की जमानत जब्त हो गई।
उत्तर प्रदेश के 17 नगर निगम की सीटों में से असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पार्टी AIMIM से कुल 9 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इन सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि 8 सीटों पर पार्टी की जमानत भी जब्त हो गई। सिर्फ मेरठ में AIMIM जीत के काफी करीब रही। AIMIM ने मेरठ से अनस को अपना प्रत्याशी बनाया था। जिन्होंने 128547 वोट हासिल किए।
इन सीटों पर जब्त हुई जमानत, नहीं छू सकी 25 हजार वोटों का भी आंकड़ा
एआईएमआईएम ने गाजियाबाद सीट से शहनाज दिलशाद को चुनावी मैदान में उतारा था। शहनाज को केवल 26 हजार 45 वोट ही मिले और पार्टी की जमानत जब्त हो गई। यहां 39.15 प्रतिशत वोटिंग हुई, जिनमें से पार्टी को 4.31 प्रतिशत वोट ही मिले। हालांकि वोट हासिल करने के मामले में एआईएमआईएम के रूप में शहनाज दूसरे नंबर पर रहीं।
आवैसी की पार्टी ने प्रयागराज से मोहम्मद नकी खानक को चुनावी मैदान में उतारा था। यहां वह तीसरे नंबर पर रहे। नकी को सिर्फ 24023 वोट मिले। यहां कुल 31.36 प्रतिशत मतदान हुआ और पार्टी को केवल 4.86 फीसदी वोट ही हासिल हुए। इसी के साथ इस सीट पर भी पार्टी की जमानत जब्त हो गई। कानपुर नगर से AIMIM की उम्मीदवार शहाना परवीन रहीं, जिनको 16332 वोट प्राप्त हुए। इस सीट पर मतदान प्रतिशत 41.34 रहा और 1.79 फीसदी के साथ AIMIM की जमानत जब्त हो गई।
बीजेपी के आगे चारों खाने चित्त हो गई AIMIM
अयोध्या में भी AIMIM का प्रदर्शन काफी खराब रहा। यहां एआईएमआईएम के कैंडिडेट रेहान को 15107 वोटों में ही संतोष करना पड़ा। 9.49 प्रतिशत हासिल वोटों के साथ यहां भी पार्टी की जमानत जब्त हो गई। बरेली, गोरखपुर, अलीगढ़ और मुरादाबाद में भी पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा और यहां भी जमानत जब्त हो गई। इस तरह असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM बीजेपी के आगे चारों खाने चित्त हो गई।
क्या है जमानत जब्त होना?
भारत का चुनाव आयोग विभिन्न नियमों और मानदंडों के तहत किसी भी चुनाव का आयोजन कराता है। लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव या फिर निकाय चुनाव हो, इसमें कैंडिडेट को नामांकन भरना पड़ता है। इस दौरान प्रत्याशी चुनाव आयोग को कुछ धनराशि जमा करवाता है। अलग-अलग चुनावों में यह रकम अलग-अलग होती है. यह रकम निर्वाचन क्षेत्र की कुल आबादी का 6वां हिस्सा होती है। अगर कोई भी प्रत्याशी अपने निर्वाचन क्षेत्र की कुल आबादी का 6वां हिस्सा हासिल नहीं कर पाता तो उसकी जमा की गई राशि चुनाव आयोग जब्त कर लेता है।
कितनी जमा करानी होती है जमानत राशि ?
लोकतंत्र भारत में कई तरह के चुनाव होते हैं, इसलिए हर चुनाव में जमानत की राशि अलग-अलग होती है। पंचायत चुनाव, ,लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव साथ ही में राष्ट्रपति के चुनाव में लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए जमानत राशि अलग-अलग होती है।
Published on:
14 May 2023 04:01 pm
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