
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरेलू सौर ऊर्जा को बढ़ावा, 9,500 से अधिक वेंडर्स के नेटवर्क से रोजगार के नए अवसर (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )
Yogi Government Solar Panel Subsidy: उत्तर प्रदेश में घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए संचालित प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत नौ लाख से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन संयंत्रों के माध्यम से प्रदेश में 3,000 मेगावाट यानी तीन गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता जुड़ चुकी है। इस विस्तार से घरों में बिजली खर्च कम करने, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और सोलर क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
रूफटॉप सोलर प्रणाली में घरों की छतों पर सौर पैनल लगाए जाते हैं, जिनसे सूर्य की रोशनी के जरिए बिजली पैदा होती है। इससे घरेलू उपभोक्ता अपनी बिजली की जरूरत का एक हिस्सा स्वयं पूरा कर सकते हैं। उत्पादन, खपत और बिजली वितरण व्यवस्था के अनुसार उपभोक्ताओं के बिल में बचत हो सकती है। इसी वजह से रूफटॉप सोलर को पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने के एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में नौ लाख से अधिक संयंत्रों की स्थापना का आंकड़ा घरेलू सौर ऊर्जा के विस्तार को दर्शाता है। हालांकि, वास्तविक लाभ प्रत्येक उपभोक्ता के प्लांट की क्षमता, मौसम, बिजली की खपत और लागू नियमों पर निर्भर करता है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन लगभग 9 से 10 मेगावाट घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ी जा रही है। तुलना के लिए दिए गए वर्ष 2026 के आंकड़ों में ऑस्ट्रेलिया में जनवरी से जून के दौरान लगभग 1.89 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित होने का उल्लेख है। यह औसतन करीब 10.4 मेगावाट प्रतिदिन बैठता है। इसी तरह, अमेरिका में आवासीय सोलर स्थापना की दैनिक दर पहली तिमाही में लगभग 13.1 मेगावाट और दूसरी तिमाही में करीब 10.9 मेगावाट बताई गई है। जर्मनी में भवनों पर स्थापित सौर क्षमता की पहली छमाही की औसत वृद्धि लगभग 17.5 मेगावाट प्रतिदिन बताई गई है। इन आंकड़ों के आधार पर उत्तर प्रदेश की स्थापना दर को बड़े सौर बाजारों के संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग देशों में आंकड़ों की परिभाषा और रिपोर्टिंग पद्धति भिन्न हो सकती है, इसलिए सीधी तुलना करते समय इन अंतरों को ध्यान में रखना जरूरी है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पात्र लाभार्थियों को केंद्र और राज्य सरकार की सहायता मिलाकर अधिकतम 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी दिए जाने का उल्लेख है। इससे प्लांट लगाने की शुरुआती लागत का बोझ कम हो सकता है। योजना में मिलने वाली वास्तविक सहायता संयंत्र की क्षमता, पात्रता और लागू दिशा-निर्देशों पर निर्भर करती है। आवेदन करने से पहले उपभोक्ताओं को आधिकारिक पोर्टल पर मौजूदा नियम, सब्सिडी की राशि, पंजीकरण प्रक्रिया और अधिकृत वेंडर से संबंधित जानकारी देखनी चाहिए। उपलब्ध विवरण में आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2027 बताई गई है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि भी जरूरी है।
यूपी नेडा के निदेशक रविन्दर सिंह के अनुसार, प्रदेश में 9,500 से अधिक वेंडर्स का नेटवर्क सोलर प्लांट लगाने और उनसे जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्रिय है। इस नेटवर्क के जरिए उपकरणों की आपूर्ति, परिवहन, इंस्टॉलेशन, रखरखाव और अन्य संबंधित गतिविधियों में एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। सौर ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार से तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं, इलेक्ट्रीशियन, इंस्टॉलेशन कर्मचारियों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं के लिए काम के अवसर पैदा हो सकते हैं। वेंडर नेटवर्क बढ़ने से दूरदराज के इलाकों में भी सोलर प्रणाली लगाने और उसकी देखभाल की सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। हालांकि, रोजगार के अनुमान और वास्तव में सृजित नौकरियों के बीच अंतर को समझने के लिए विस्तृत आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।
प्रदेश में स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता के आधार पर बिजली उत्पादन की संभावनाओं का भी अनुमान लगाया गया है। यदि कुल क्षमता 3,000 मेगावाट हो और प्रति किलोवाट प्रतिदिन औसतन 4.5 यूनिट बिजली उत्पादन माना जाए, तो सैद्धांतिक रूप से प्रतिदिन लगभग 1.35 करोड़ यूनिट बिजली पैदा हो सकती है। यदि इस बिजली का सांकेतिक मूल्य 6.50 रुपये प्रति यूनिट माना जाए, तो प्रतिदिन इसका अनुमानित आर्थिक मूल्य करीब 8.78 करोड़ रुपये और सालाना लगभग 3,202 करोड़ रुपये बैठता है। यह गणना एक अनुमान है, वास्तविक बचत या आमदनी नहीं। वास्तविक उत्पादन धूप, मौसम, पैनलों की दिशा, तकनीकी दक्षता और रखरखाव पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, बिजली का आर्थिक मूल्य उपभोक्ता की लागू दर और बिजली के इस्तेमाल के तरीके के अनुसार बदल सकता है।
रूफटॉप सोलर के बढ़ते इस्तेमाल से सौर पैनल, इन्वर्टर, केबल, माउंटिंग स्ट्रक्चर और अन्य उपकरणों की मांग बढ़ सकती है। इससे आपूर्ति, परिवहन, इंस्टॉलेशन और रखरखाव से जुड़े कारोबार को भी अवसर मिलते हैं। स्थानीय स्तर पर उद्यमों के विस्तार से रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना का विस्तार घरेलू बिजली खर्च कम करने और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। आने वाले समय में योजना का प्रभाव इस बात से भी आंका जाएगा कि कितने उपभोक्ताओं को वास्तविक बचत मिलती है, संयंत्र कितनी प्रभावी ढंग से काम करते हैं और रोजगार के कितने अवसर स्थायी रूप लेते हैं।
Updated on:
15 Oct 2026 02:08 pm
Published on:
15 Oct 2026 02:08 pm
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