
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विंध्याचल धाम में मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन किए (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
CM Yogi Girls Education: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब नारी शक्ति स्वस्थ, शिक्षित और समर्थ होती है, तभी राष्ट्र का वर्तमान सुरक्षित और भविष्य उज्ज्वल बनता है। उन्होंने जगत जननी मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप को वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी बताते हुए कहा कि मां स्कंदमाता की आराधना समाज को मातृशक्ति के सम्मान, संरक्षण और सशक्तिकरण का संदेश देती है। मुख्यमंत्री ने बेटियों की शिक्षा को प्रदेश के विकास और उनके आत्मविश्वास से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षा में निवेश केवल एक बेटी के जीवन को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को मजबूत करने का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट के माध्यम से महिला स्वास्थ्य, मातृ-शिशु कल्याण और बालिका शिक्षा के मुद्दे उठाए। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले की सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस समय बेटियों को संबल देने और महिलाओं के स्वास्थ्य की बेहतर व्यवस्था करने के बजाय राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने बीते वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं और बेटियों के लिए सुविधाओं का विस्तार किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां स्कंदमाता के स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि देवी का यह रूप वात्सल्य, ममता और पोषण का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की उपासना समाज को यह प्रेरणा देती है कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी समाज की प्रगति इस बात से तय होती है कि वहां महिलाओं और बेटियों को कितने अवसर, कितना सुरक्षित वातावरण और आगे बढ़ने के लिए कितनी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उज्ज्वल भविष्य की नींव तैयार करने जैसा है। उनका कहना है कि जब बेटियां शिक्षित और आत्मनिर्भर बनती हैं, तो वे अपने परिवार के साथ-साथ समाज के विकास में भी प्रभावी योगदान देती हैं।
मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में माताओं के स्वास्थ्य और बेटियों की शिक्षा की पर्याप्त अनदेखी हुई। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर राजनीतिक कुनबे को पोषित करने में व्यस्त रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली।
योगी आदित्यनाथ ने अस्पतालों की बदहाली, दवाओं की कमी और संस्थागत प्रसव की कमजोर व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों के कारण मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को लेकर चिंताजनक स्थिति बनी हुई थी। मुख्यमंत्री ने इन समस्याओं को पिछली व्यवस्था की कमियों से जोड़ते हुए वर्तमान सरकार के प्रयासों को महिला और बाल कल्याण के क्षेत्र में बदलाव का आधार बताया। हालांकि, इन दावों और तुलनात्मक आंकड़ों का स्वतंत्र आकलन संबंधित सरकारी आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में महिलाओं और बेटियों के कल्याण को लेकर कई स्तरों पर काम किया गया है। उनके अनुसार, सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित मातृत्व तक विभिन्न आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समग्र सुरक्षा एवं कल्याण का ढांचा तैयार किया है। उन्होंने कहा कि पहले संसाधनों और सुविधाओं की कमी के कारण अनेक बेटियों को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ती थी। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां किसी बेटी की शिक्षा में बाधा न बनें। मुख्यमंत्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर देना प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए भी आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए ऑपरेशन कायाकल्प के तहत हुए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता का स्तर पहले के लगभग 36 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत से अधिक हो गया है। विद्यालयों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है। सुरक्षित भवन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य आधारभूत सुविधाएं विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति तथा पढ़ाई के अनुकूल माहौल बनाने में सहायक होती हैं। मुख्यमंत्री ने इन प्रयासों को शिक्षा व्यवस्था में बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि विद्यालयों की सुविधाएं बेहतर होने से बेटियों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में स्कूल ड्रॉपआउट रेट में कमी का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि यह दर लगभग 20 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत से भी नीचे आ गई है। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार बेटियों की पढ़ाई जारी रखने में सहायक रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल छोड़ने की दर कम होना एक महत्वपूर्ण संकेतक है, क्योंकि इससे विद्यार्थियों के लंबे समय तक शिक्षा से जुड़े रहने का पता चलता है। हालांकि, इस आंकड़े के सही आकलन के लिए संबंधित शैक्षणिक स्तर, अवधि और आधिकारिक आंकड़ों का संदर्भ आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा में निरंतरता को बेटियों के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए इसे प्रदेश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री ने अटल आवासीय विद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से श्रमिकों और वंचित वर्गों के बच्चों को बेहतर आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों को आधुनिक शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के अवसर मिलने की बात कही।
इसके साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कक्षा 12 तक शिक्षा की सुविधा के विस्तार को भी महत्वपूर्ण कदम बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था से बालिकाओं को अपनी पढ़ाई पूरी करने और आगे की शिक्षा के लिए तैयार होने में मदद मिल सकती है। आवासीय विद्यालयों की सुविधा उन परिवारों के लिए विशेष महत्व रखती है, जहां आर्थिक कठिनाइयों या अन्य परिस्थितियों के कारण बेटियों की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बेटियों की शिक्षा में निवेश उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ प्रदेश के भविष्य को भी सशक्त बनाता है। शिक्षित बेटियां बेहतर अवसरों का लाभ उठा सकती हैं, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बन सकती हैं और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ा सकती हैं।
मुख्यमंत्री के संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि महिला स्वास्थ्य, सुरक्षित मातृत्व और बालिका शिक्षा को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इन क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना महिलाओं को अधिक अवसर देने और सामाजिक विकास को गति प्रदान करने के लिए जरूरी है। मां स्कंदमाता के वात्सल्य और पोषण के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने नारीशक्ति के सम्मान तथा बेटियों को शिक्षित और समर्थ बनाने के महत्व को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री का संदेश यही है कि महिला स्वास्थ्य और बालिका शिक्षा को प्राथमिकता देकर ही सशक्त परिवार, जागरूक समाज और उज्ज्वल प्रदेश के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
Updated on:
15 Oct 2026 12:09 pm
Published on:
15 Oct 2026 12:04 pm
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