
अब सपा के वोट बैंक पर चंद्रशेखर की नजर? Source- X (@BhimArmyChief)
UP Politcs: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने चुनावी तैयारियों की रफ्तार तेज कर दी है। हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने 45 विधानसभा सीटों के लिए प्रभारियों की सूची जारी कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल बहुजन समाज पार्टी (BSP) ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के लिए भी नई चुनौती खड़ी करने की कोशिश है।
जारी सूची में अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम और सिख समुदाय के नेताओं को प्रमुखता दी गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी ने सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों और प्रभारियों का चयन किया है।
-18 अनुसूचित जाति (SC)
-16 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
-10 मुस्लिम
-1 सिख
इसके अलावा लखनऊ छावनी, गोविंद नगर और विश्वनाथगंज समेत पांच सामान्य सीटों पर भी अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत का कहना है कि प्रभारियों की सूची से साफ संकेत मिलता है कि आजाद समाज पार्टी अब केवल BSP के वोट बैंक तक सीमित नहीं रहना चाहती। उनके मुताबिक, BSP के कमजोर होने के बाद पार्टी खुद को उसके विकल्प के रूप में पेश कर रही थी, लेकिन अब दलित, पिछड़ा और मुस्लिम समुदाय पर फोकस कर वह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सामाजिक आधार में भी अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है। राजनीति गलियारों में चर्चा है कि अब सपा के वोट बैंक पर चंद्रशेखर की नजर है।
राजनीतिक विश्लेषक रतन मणि लाल का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद ने इस बार अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव किया है। उनके अनुसार, पहले उनकी राजनीति का मुख्य केंद्र BSP थी, लेकिन अब पार्टी सीधे समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाले सामाजिक समीकरणों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जिन सीटों पर प्रभारी घोषित किए गए हैं, वहां का सामाजिक ढांचा काफी हद तक सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण से मेल खाता है।
रतन मणि लाल का कहना है कि फिलहाल आजाद समाज पार्टी का संगठन और चुनावी नेटवर्क इतना मजबूत नहीं माना जा सकता कि वह बड़े स्तर पर समाजवादी पार्टी के वोट बैंक को प्रभावित कर दे। हालांकि, उनका मानना है कि इस रणनीति से पार्टी ने SP के सामने राजनीतिक असहजता जरूर पैदा कर दी है और आगामी चुनाव में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ी है।
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सुनील चितौड़ ने विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी स्वतंत्र विचारधारा के साथ राजनीति कर रही है और किसी भी दल की 'बी-टीम' नहीं है। पार्टी अपने दम पर जनता के बीच जाने और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
सुनील चितौड़ ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारना है। उन्होंने जानकारी दी कि अगली उम्मीदवारों और प्रभारियों की सूची अगले 10 से 12 दिनों के भीतर जारी की जाएगी।
गठबंधन की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में सुनील चितौड़ ने कहा कि राजनीति में संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी दल की ओर से बातचीत होती है, तो उस पर अंतिम निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ही लेंगे।
सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिलने के सवाल पर पार्टी ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन जाति के आधार पर नहीं, बल्कि संगठन में सक्रिय भूमिका, विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और क्षेत्रीय कामकाज को ध्यान में रखकर किया जाता है।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी की राजनीति पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ मुद्दे उठाने वाली हर राजनीतिक ताकत विपक्ष की आवाज को मजबूत करती है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी के बीच किसी भी तरह के गठबंधन को लेकर कोई बातचीत या पहल नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आजाद समाज पार्टी की शुरुआती चुनावी सक्रियता यह संकेत देती है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में अपने जनाधार का विस्तार करना चाहती है। आने वाले महीनों में पार्टी की अगली उम्मीदवार सूची, संगठनात्मक विस्तार और संभावित राजनीतिक समीकरण उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।
Updated on:
02 Aug 2026 03:47 pm
Published on:
02 Aug 2026 03:47 pm
