
StartinUP पोर्टल के जरिए स्टार्टअप, निवेशकों, इन्क्यूबेटरों और मेंटर्स को एक डिजिटल मंच पर जोड़ने की तैयारी (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
UP Startup Policy: उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को विकसित करने और युवाओं के नए विचारों को कारोबार में बदलने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने स्टार्टअप नीति-2026 के तहत छह प्रमुख स्तंभों पर फोकस किया है। नीति में बुनियादी ढांचे के विकास, वित्तीय सहायता, प्रतिभा विकास, उद्योगों से जुड़ाव, प्रचार-प्रसार और संस्थागत सहयोग को प्राथमिकता दी गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और डीप-टेक जैसी उभरती तकनीकों पर जोर देकर नवाचार आधारित उद्यमों के लिए अवसर बढ़ाने की योजना है।
नई नीति के तहत युवाओं, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नए उद्यमियों को स्टार्टअप शुरू करने से लेकर उसे बाजार तक पहुंचाने में मदद देने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए डिजिटल सुविधाओं, निवेशकों से संपर्क, प्रशिक्षण, इन्क्यूबेशन और सरकारी प्रोत्साहनों तक पहुंच को एकीकृत करने पर जोर है। सरकार की मंशा प्रदेश में ऐसा माहौल तैयार करने की है, जहां नए विचारों को जरूरी संसाधन और मार्गदर्शन मिल सके।
यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन के अनुसार, स्टार्टअप नीति-2026 का उद्देश्य युवाओं को रोजगार तलाशने वालों के साथ रोजगार देने वाले उद्यमियों के रूप में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। नीति के छह स्तंभों के माध्यम से स्टार्टअप के लिए जरूरी सुविधाओं, पूंजी, कौशल, औद्योगिक सहयोग और संस्थागत सहायता को मजबूत करने पर काम किया जाएगा। पहले स्तंभ के तहत स्टार्टअप के लिए भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। इन्क्यूबेशन सेंटर, तकनीकी संसाधन और सहयोगी सुविधाएं नए उद्यमों को शुरुआती स्तर पर काम करने में मदद कर सकती हैं। इससे उन युवाओं को भी अवसर मिल सकता है, जिनके पास नया विचार तो है, लेकिन उसे विकसित करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
दूसरे स्तंभ में वित्तीय सहायता को प्रमुखता दी गई है। स्टार्टअप के शुरुआती चरण में पूंजी की कमी अक्सर बड़ी चुनौती होती है। नीति के तहत सरकारी योजनाओं और निजी निवेशकों से वित्तीय सहयोग प्राप्त करने के अवसर बढ़ाने पर जोर रहेगा। इससे नए उद्यमियों को अपने उत्पाद विकसित करने, तकनीक को बेहतर बनाने और कारोबार का विस्तार करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक सहायता संबंधित योजनाओं की पात्रता और निर्धारित शर्तों के अनुसार मिलेगी।
तीसरे स्तंभ में प्रतिभा विकास और क्षमता निर्माण को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत उद्यमिता विकास, स्टार्टअप प्रबंधन, वित्तीय साक्षरता, नियामकीय अनुपालन और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे विषयों पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना है। तकनीक आधारित उद्यमों के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन और कौशल विकास की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस व्यवस्था से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शुरुआती उद्यमियों को अपने विचारों को व्यावसायिक मॉडल में बदलने में मदद मिल सकती है।
चौथे स्तंभ के तहत स्टार्टअप, उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य नए उद्यमों को वास्तविक जरूरतों के अनुरूप उत्पाद और सेवाएं विकसित करने तथा बाजार तक पहुंचने के अवसर उपलब्ध कराना है। उद्योगों से जुड़ाव के जरिए स्टार्टअप को तकनीकी विशेषज्ञता, संभावित ग्राहकों और कारोबारी साझेदारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सकती है।
पांचवें स्तंभ में प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रचार-प्रसार पर जोर है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे नवाचारों और उद्यमों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने, साझेदारियां विकसित करने और निवेश के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा। छठा स्तंभ संस्थागत क्षमता और सहयोग तंत्र को मजबूत करने से जुड़ा है। इसमें स्टार्टअप, निवेशकों, इन्क्यूबेटरों, मेंटर्स और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
नई नीति के क्रियान्वयन में StartinUP ऑनलाइन पोर्टल की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसे एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां स्टार्टअप, निवेशक, इन्क्यूबेटर, मेंटर्स और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसे संस्थान एक मंच पर जुड़ सकेंगे। पोर्टल पर नीति, सरकारी योजनाओं, प्रोत्साहनों, इन्क्यूबेशन सेंटरों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और आगामी आयोजनों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
इस प्लेटफॉर्म के जरिए स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे। पात्र संस्थाएं प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन करने और अपने दावे संबंधित नोडल एजेंसी के समक्ष जमा करने की सुविधा भी प्राप्त कर सकेंगी। आवेदनों के मूल्यांकन और मंजूरी की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होगी। पोर्टल पर प्रबंधन सूचना प्रणाली यानी एमआईएस की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, जिससे गतिविधियों और नीति के क्रियान्वयन की निगरानी की जा सकेगी।
स्टार्टअप से जुड़ी समस्याओं और सवालों के समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन तथा सोशल मीडिया आधारित सहायता की सुविधा देने की भी योजना है। इससे उद्यमियों को आवेदन प्रक्रिया, योजनाओं और उपलब्ध संसाधनों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकेगी। पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों तक पहुंच भी आसान बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, StartinUP पोर्टल को केंद्र सरकार के डीपीआईआईटी, भास्कर और मार्ग जैसे स्टार्टअप इंडिया प्लेटफार्म से जोड़ने की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाएगा। इस एकीकरण का उद्देश्य अलग-अलग मंचों पर उपलब्ध जानकारी और सुविधाओं तक पहुंच को बेहतर बनाना है। भविष्य में जरूरत के अनुसार नई डिजिटल सुविधाएं जोड़ने की संभावनाएं भी रखी गई हैं।
स्टार्टअप नीति-2026 के जरिए प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए एक साझा व्यवस्था विकसित करने पर जोर है। छह प्रमुख स्तंभों के साथ डिजिटल पोर्टल, वित्तीय सहयोग, प्रशिक्षण और उद्योगों से संपर्क जैसी सुविधाएं नए उद्यमों के लिए उपयोगी हो सकती हैं। नीति का वास्तविक प्रभाव इसके क्रियान्वयन, उपलब्ध सहायता, निवेश की पहुंच और स्टार्टअप को मिलने वाले बाजार अवसरों पर निर्भर करेगा।
Updated on:
15 Oct 2026 03:37 pm
Published on:
15 Oct 2026 02:50 pm
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