
कारीगरों के लिए बड़ी सौगात, सरकार देगी मुफ्त प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
Vishwakarma Shram Samman Yojana 2026, UP News :प्रदेश सरकारपारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम मेंमुख्यमंत्रीकी महत्वाकांक्षी विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत जनपद के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पारंपरिक कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक आधारित टूलकिट उपलब्ध कराई जाएगी। योजना का उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों के कौशल का विकास कर उन्हें आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना तथा उनके रोजगार और आय में वृद्धि करना है।
जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र द्वारा योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक पात्र कारीगरों और हस्तशिल्पियों को 30 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन करने का अवसर दिया गया है।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना प्रदेश सरकार की उन प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिनका लक्ष्य पारंपरिक व्यवसायों को संरक्षित करने के साथ उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। समय के साथ कई पारंपरिक व्यवसाय आर्थिक चुनौतियों और आधुनिक प्रतिस्पर्धा के कारण प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि इन व्यवसायों से जुड़े लोगों को बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराकर उनकी कार्यक्षमता बढ़ाई जाए।
योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को 10 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें अपने व्यवसाय से संबंधित नवीन तकनीकों, आधुनिक उपकरणों के उपयोग, गुणवत्ता सुधार और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी जाएगी। इससे कारीगर अपने कार्य को अधिक प्रभावी और लाभकारी बना सकेंगे।
इस योजना का लाभ बढ़ई, नाई, लोहार, धोबी, राजमिस्त्री, हलवाई, दर्जी तथा अन्य पारंपरिक दस्तकारी व्यवसायों से जुड़े लोगों को मिलेगा। सरकार का मानना है कि ये व्यवसाय ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है और इन्हें मजबूत बनाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार पारंपरिक कारीगरों के पास वर्षों का अनुभव और हुनर होता है, लेकिन आधुनिक उपकरणों और तकनीकी जानकारी के अभाव में वे अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पाते। यह योजना उनकी इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।
योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लाभार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित उन्नत टूलकिट भी निःशुल्क प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही प्रशिक्षण प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जो उनके कौशल का आधिकारिक प्रमाण होगा। आधुनिक उपकरण मिलने से कारीगरों को अपने कार्य में गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार करने का अवसर मिलेगा। इससे वे अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और अपनी आय में भी वृद्धि कर पाएंगे।
योजना में आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी विभागीय वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदकों को अपने आवश्यक दस्तावेज जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र कार्यालय में जमा करने होंगे।
सरकार का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग इसका लाभ उठा सकें। विभागीय अधिकारियों के अनुसार आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को समय रहते सभी दस्तावेज तैयार रखने चाहिए ताकि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या न आए।
योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून 2026 निर्धारित की गई है। अधिकारियों ने पात्र कारीगरों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। अंतिम तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। इसलिए इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना आवश्यक होगा।
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक के पास आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, बैंक पासबुक की छायाप्रति और पासपोर्ट आकार का नवीनतम फोटो होना आवश्यक है। इसके अलावा आवेदन के दौरान मांगे गए अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। दस्तावेजों की सत्यता और पूर्णता के आधार पर ही आवेदन स्वीकार किया जाएगा। इसलिए आवेदकों को सही जानकारी और वैध अभिलेख प्रस्तुत करने की सलाह दी गई है।
योजना का लाभ केवल उत्तर प्रदेश के निवासियों को मिलेगा। आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। आयु की गणना आवेदन की तिथि के आधार पर की जाएगी। इसके अलावा आवेदक का किसी पारंपरिक व्यवसाय या दस्तकारी कार्य से जुड़ा होना आवश्यक है। पात्रता के लिए जाति को आधार नहीं बनाया गया है, बल्कि वास्तविक रूप से व्यवसाय से जुड़े कारीगरों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है कि योजना का लाभ वास्तविक कारीगरों तक पहुंचे। इसके लिए आवेदकों को अपने पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े होने का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। यह प्रमाण पत्र ग्राम प्रधान, नगर पंचायत अध्यक्ष अथवा नगर पालिका या नगर निगम के संबंधित वार्ड सदस्य द्वारा जारी किया जाएगा। इससे पात्र लाभार्थियों की पहचान करने में आसानी होगी और योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकेगा।
योजना के अंतर्गत एक परिवार का केवल एक सदस्य ही लाभ प्राप्त करने का पात्र होगा। यह व्यवस्था अधिक से अधिक परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।इसके साथ ही आवेदक को एक शपथ-पत्र भी देना होगा, जिसमें यह घोषित करना होगा कि उसने पहले किसी प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत टूलकिट और मानदेय का लाभ प्राप्त नहीं किया है।
सूत्रों का मानना है कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना पारंपरिक कारीगरों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण मिलने से कारीगर अपने कार्य को अधिक पेशेवर तरीके से कर सकेंगे और बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ा सकेंगे। योजना से स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा पारंपरिक कारीगरी की समृद्ध विरासत को भी संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
Published on:
20 Jun 2026 11:21 am
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