
PCS अफसरों के तबादले फोटो सोर्स :Social Media
PCS Officers Transfers: उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य प्रशासनिक सेवाओं (पीसीएस) के अधिकारियों के तबादले कर एक बार फिर प्रशासनिक ढांचे को सशक्त और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाया है। इस बदलाव के तहत दो वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों संत कुमार और शेरी की जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण फेरबदल किया गया है। इन तबादलों का उद्देश्य प्रशासनिक तंत्र में दक्षता बढ़ाना, बेहतर तालमेल स्थापित करना और जनसेवा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करना है।
पीसीएस अधिकारी संत कुमार जो वर्तमान में उप आयुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग के पद पर कार्यरत थे, को स्थानांतरित कर उप संचालक, चकबंदी बनाया गया है। चकबंदी विभाग भूमि प्रबंधन एवं सुधारों का अहम स्तंभ है, और इसमें जिम्मेदारियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के सुनियोजित पुनर्गठन की होती हैं।
पीसीएस अधिकारी शेरी जो अभी तक उप संचालक, चकबंदी मुख्यालय में पदस्थ थे, को उप आयुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग के पद पर नियुक्त किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग में उप आयुक्त का कार्य निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करना होता है।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधता से भरे राज्य में प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों और तबादलों की प्रक्रिया न केवल एक नियमित अभ्यास है, बल्कि यह शासन की नीतियों के कार्यान्वयन, क्षेत्रीय संतुलन और कर्मठ अधिकारियों की क्षमताओं के अधिकतम उपयोग से भी जुड़ा होता है। राज्य निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसकी भूमिका प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की होती है। यहां उप आयुक्त का पद अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली होता है। वहीं, चकबंदी विभाग राज्य की भूमि नीति के क्रियान्वयन, खेतों की पुनः सीमांकन और ग्रामीण विकास में सहयोग प्रदान करता है।
इन दोनों विभागों में अनुभव, समझदारी और व्यावहारिकता से काम लेने वाले अधिकारियों की आवश्यकता होती है। संत कुमार और शेरी दोनों ही अधिकारियों के प्रशासनिक अनुभवों को देखते हुए यह बदलाव उनकी क्षमताओं का यथोचित उपयोग करने की दिशा में एक रणनीतिक निर्णय प्रतीत होता है।
संत कुमार ने राज्य निर्वाचन आयोग में अपनी सेवाओं के दौरान निष्पक्ष चुनाव संचालन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में प्रभावशाली योगदान दिया। अब जब उन्हें चकबंदी विभाग में भेजा गया है, तो उन पर ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवादों के समाधान, चकमार्गों के विकास, और समुचित खेती योग्य भूखंडों के पुनर्विन्यास का दायित्व होगा। चकबंदी का काम सीधे ग्रामीण समाज से जुड़ा हुआ है। इस पद पर रहते हुए संत कुमार को कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ राजस्व से जुड़े मामलों में भी सतर्क रहना होगा। ग्रामीण सुधारों की दिशा में उनका अनुभव सहायक साबित हो सकता है।
वहीं दूसरी ओर शेरी जो चकबंदी मुख्यालय में उप संचालक के रूप में कार्य कर रही थीं, अब उन्हें राज्य निर्वाचन आयोग में उप आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति तब की गई है जब पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव कराना ही नहीं, बल्कि चुनाव संबंधी सभी प्रक्रियाओं को संविधान और कानून के अनुरूप संचालित करना भी है। मतदाता सूची का अद्यतन, मतदान केंद्रों का निर्धारण, प्रशिक्षण कार्यक्रम, जनजागरूकता अभियान, आचार संहिता का पालन इत्यादि कार्यों में अब शेरी को नेतृत्व देना होगा। शेरी का प्रशासनिक अनुभव, तकनीकी समझ और संवेदनशील दृष्टिकोण निश्चित रूप से इस विभाग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगा।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो यह फेरबदल न केवल नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार अनुभवी अधिकारियों को उनकी विशेषज्ञता के अनुसार पदों पर तैनात कर रही है। इससे शासन की कार्यक्षमता बढ़ेगी और जनता को समय पर, प्रभावी सेवा उपलब्ध कराना सुनिश्चित होगा। इसके अलावा, राज्य सरकार यह भी संकेत दे रही है कि वह विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। चकबंदी जैसे अति संवेदनशील विभाग में संत कुमार की तैनाती और चुनाव आयोग में शेरी की नियुक्ति इसी दृष्टिकोण की पुष्टि करती है।
इस छोटे मगर सटीक फेरबदल पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। राज्य सेवा में अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपने को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की रणनीतिक तैनातियाँ ही वास्तव में प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त बनाती हैं। वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए आयोग में नई नियुक्ति समयबद्ध और उद्देश्यपरक है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि चुनावों में कोई प्रशासनिक शिथिलता न हो।
Published on:
09 Jul 2025 02:31 am
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