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Vasant Panchami 2018 : जानिए कैसे करें देवी सरस्वती की पूजा – कथा और ध्यान, शुभ मुहूर्त और समय भी देखें

Vasant Panchami 2018 : पंचमी की तिथि - 15:33 बजे से (21 जनवरी 2018) से 16:24 बजे (22 जनवरी 2018) तक रहेगी।

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vasant panchami 2018

Neeraj Patel

Vasant Panchami 2018 : विद्या और संगीत की देवी माता सरस्वती का जन्म बसंत पंचमी के दिन हुआ था। यह वसंत पंचमी इस बार 22 जनवरी दिन सोमवार को पड़ रही है। वसंत पंचमी सोमवार के दिन पड़ने पर इस दिन का बहुत ही महत्व माना गया है। बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त - 07:17 से 12:32 बजे तक रहेगा व पंचमी की तिथि - 15:33 बजे से (21 जनवरी 2018) से 16:24 बजे (22 जनवरी 2018) तक रहेगी।

पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजा का समय - 07:17 से 12:32 बजे तक

पंचमी तिथि का आरंभ - 15:33 बजे से (21 जनवरी 2018) से 16:24 बजे (22 जनवरी 2018) तक

पर्व का महत्व

वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नई उमंग से सूर्योदय होता है और नई चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है।

ये भी पढ़े - जानिए वसन्त पंचमी की क्या है कथा और कैसे करें ध्यान

बसन्त पंचमी कथा

कोलकाता में पूजा के लिए निर्मित देवी सरस्वती की प्रतिमा (वर्ष 2000) सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा। इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी।

ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से ख़ुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और यूं भारत के कई हिस्सों में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है।

ऐसे करें बसंत पंचमी पूजा

1. प्रात:काल स्नाना करके पीले वस्त्र धारण करें।

2. मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें तत्पश्चात कलश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें।

3. मां सरस्वती की पूजा करें।

4. मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन व स्नान कराएं।

5. माता का श्रंगार कराएं ।

6. माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं।

7. प्रसाद के रुप में खीर अथवा दुध से बनी मिठाईयों का भोग लगाएं।

8. श्वेत फूल माता को अर्पण करें।

कुछ क्षेत्रों में देवी की पूजा कर प्रतिमा को विसर्जित भी किया जाता है। विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर गरीब बच्चों में कलम व पुस्तकों का दान करें। संगीत से जुड़े व्यक्ति अपने साज पर तिलक लगा कर मां की आराधना करें व मां को बांसुरी भेंट करें।

सबसे पहले माता सरस्वती का ऐसे करें ध्यान

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।।

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।1।।

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं । वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।।

हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् । वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।।