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लखनऊ. सर्दी का मौसम (Winter season) अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुआ है कि प्रदूषण हवा (Air pollution) में घुलकर लोगों का दम घोटने लगी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मॉनीटरिंग स्टेशन द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में देश के टॉप 10 प्रदूषित शहरों का जिक्र है। खतरनाक बात यह है कि इसमें छह शहर केवल यूपी के हैं, जिसमें मुजफ्फरनगर सबसे आगे है। पिछले वर्ष तक जहां प्रदूषण लोगों की सेहत बिगाड़ने के लिए काफी था। वहीं एक अध्ययन के अनुसार, प्रदूषण ठंड के साथ मिलकर कोरोना (coronavirus in UP) के खतरे को भी बढ़ाएगा। मतलब बदलता मौसम व बढ़ता प्रदूषण दोनों ही बेहद हानिकारक स्थिति पैदा कर सकते हैं।
मुजफ्फर नगर का पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 318, मुरादाबाद का 317, वाराणसी का 311, बुलंदशहर का 298, कानपुर का 292, बागपत का पीएम 280 रिकॉर्ड किया गया है। वायरस के मद्देनजर एक शोध के मुताबिक, जिन देशों में कोरोनावायरस का प्रकोप सर्वाधिक है वहां वायु प्रदूषण इसके सामान्य विभाजक की भूमिका निभा सकता है। शोधकर्ताओं ने चेताया है कि सर्दियों में न केवल वायरस तेजी से फैलेगा बल्कि वायु प्रदूषण और स्मॉग में खतरा भी बढ़ जाएगा। पर्यावरण व स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोरोना की चपेट में आने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है, क्योंकि हवा में मौजूद प्रदूषण की पुरानी बीमारी का संबंध गंभीर संक्रमण और ज्यादा मौत से होता है।
कोरोना का वायु प्रदूषण से सीधा संबंध-
अभी तक किए गए अध्ययन के अनुसार कोरोना से व्यक्ति की सांस लेने की प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लेकिन हाल में पाया गया है कि वायरस व्यक्ति के पूरे शरीर के लिए हानिकारक बन गया है। यह शरीर में मौजूद लगभग सभी महत्वपूर्ण अंगों का नुकसान पहुंचा रहा है। कोरोना वायरस पर हुए पूर्व अध्ययनों में यह तर्क सही साबित हुए तो इस वायरस का वायु प्रदूषण से सीधा संबंध हो सकता है क्योंकि दोनों ही स्थिति में फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है। वहीं सर्दी बढ़ते ही कोरोना अधिक समय के लिए संक्रामक हो जाएगा।
Published on:
21 Oct 2020 03:07 pm
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