
यूपी पुलिस ने फिल्मी भाषा में रोड सेफ्टी का संदेश दिया। PC: @Uppolice, Patrika
“मोहब्बत में सेफ्टी जरूरी है।” सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटे का सबसे चर्चित और बहसित लाइन बन चुकी है। इस लाइन ने जहां हंसी के मीम्स बनाए, वहीं लोगों के दिलों को भी छुआ और एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब पब्लिक अवेयरनेस के लिए इमोशनल और सिनेमैटिक भाषा ज्यादा असरदार हो गई है?
उत्तर प्रदेश पुलिस ने सड़क सुरक्षा को लेकर जिस तरह से फिल्मी और भावनात्मक शैली अपनाई है, वो सामान्य सूचना अभियानों से बिल्कुल अलग है। हाल ही में जारी एक वीडियो में, फिल्म ‘सैय्यारा’ का रोमांटिक सीन लिया गया है, जिसमें अभिनेता आहान पांडे और अभिनेत्री अनीत पडडा बाइक पर बिना हेलमेट के दिखते हैं। यूपी पुलिस ने उसी सीन को एडिट किया, दोनों के सिर पर हेलमेट जोड़ दिए और स्लाइड में लिखा,“मोहब्बत में सेफ्टी ज़रूरी है।”
यूपी पुलिस ने इससे पहले भी एक ट्वीट किया था, जिसमें लिखा था, सैयारा’ से ‘स्कैम ना हो जाये यारा’, ‘सैयारा’ देखकर लोग सिनेमाघरों में बेहोश हो रहे हैं… लेकिन असली बेहोशी तब होगी जब ‘I love you’ के बाद ‘OTP भेजो प्लीज़’ आएगा और अकाउंट का बैलेंस ₹0 दिखाएगा। ❤️ दिल दें, OTP नहीं।
यूपी पुलिस के इन ट्वीटों पर लोग अजब गजब रियेक्शन दे रहे हैं। आइए पढ़ते हैं कुछ रिएक्शन
@Vichar_2025 नाम के यूजर ने लिखा...
सर अगर सैयारा न हो तो..??
हेलमेट लगाना जरूरी है..?
@yadav_sunil01 नाम के यूजर ने लिखा, 'आज कल #SAIYAARA मूवी बहुत ट्रेंड हो रही हैं। इसी ट्रेंड को लेकर #UPPOLICE ने भी एक ट्वीट किया है 🙅 हेलमेट पहनिए, सैयारा को भी पहनाइए…..वरना रोमांस से पहले ही रोडमैप बदल सकता है मोहब्बत में सेफ्टी ज़रूरी है।"
बता दें कि ‘Saiyaara’ नाम इन दिनों दो वजहों से ट्रेंड में है। पहलती वजह फिल्म है। इसमें यंग जनरेशन की एक दर्दभरी कहानी है, जिसे "too much crying, too less realism" कहकर ट्रोल किया जा रहा है।
दूसरी वजह UP Police का ‘Saiyaara-टाइप’ रोड सेफ्टी कैंपेन, जो उसी इमोशनल अप्रोच में है। थोड़ा फिल्मी, थोड़ा रियल, और बहुत ज्यादा इंसानी।
अब सवाल ये है कि क्या पुलिस जैसे ‘सीरियस’ डिपार्टमेंट्स को भी ऐसे ‘फिल्मी’ अंदाज़ में मैसेज देना चाहिए? इस पर हमने PR और डिजिटल कम्युनिकेशन एक्सपर्ट्स से बात की। एक्सपर्ट मानते हैं कि Gen-Z और मिलेनियल्स तक पहुंचने के लिए अब ‘हार्ट-टचिंग’ नैरेटिव जरूरी हैं। उनका कहना है, "प्लेन इंस्ट्रक्शन अब नहीं चलते। अगर आप किसी को झकझोरना चाहते हैं, तो उसकी भावनाओं को छूना पड़ेगा।"
‘Saiyaara’ जैसी इमोशनल फिल्मों और यूपी पुलिस के वीडियो को देखकर एक बात साफ है कि सार्वजनिक संदेशों में अब इमोशन, कहानी और सिनेमैटिक अपील का उपयोग आम हो रहा है। लेकिन यह भी सच है कि जनरेशन-Gap की वजह से इन संदेशों पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।
एक वर्ग इसे ‘ओवरड्रामैटिक’ कहकर नकारता है।
दूसरा वर्ग इसे ‘कनेक्टेड और इंसानी’ कहकर अपनाता है।
Updated on:
24 Jul 2025 09:39 pm
Published on:
24 Jul 2025 09:27 pm
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