
लखनऊ. कभी मायावती के राइट हैंड के तौर पर पहचाने जाने वाले कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब उन्हीं की मुश्किलें बढ़ाने को तैयार हैं। गुरुवार को बसपा के पूर्व कद्दावर नेता व विधानपरिषद सदस्य बेटे अपने बेटे अफजाल सिद्दीकी और सैकड़ों समर्थकों समेत कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये। हालांकि, नसीमुद्दीन सिद्दीकी की पहली प्राथमिकता सपा में शामिल होना था, लेकिन वहां बात नहीं बनी, जिसके चलते वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर और प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद समेत कई नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो गये।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी की बसपा की सभी सरकारों में कई अहम पदों पर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में मायावती ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बेटे अफजाल सिद्दीकी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी का स्टार प्रचारक बनाया था। बसपा से निकाले जाने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 'राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा' बनाया। तब से वह लगातार बसपा के वोटरों को अपने फेवर में करने के लिये एकजुट कर रहे हैं।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी मुस्लिमों की ही राजनीति करते हैं। उन्हें लगता था कि समाजवादी पार्टी ही उनके लिये सही विकल्प साबित होगी। इसके लिये उन्होंने तीन बार अखिलेश यादव से मुलाकात भी की। सितंबर 2017 में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की चर्चाएं भी शुरू हो गई थीं। लेकिन समाजवादी पार्टी में पहले ही कई बड़े मुस्लिम नेताओं ने उन्हें खास तवज्जो नहीं दी, जिसके चलते नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस पार्टी की ओर रुख किया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस में शामिल होना नसीमुद्दीन सिद्दीकी की मर्जी नहीं, बल्कि मजबूरी है।
सपा-बसपा को होगा नुकसान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कांग्रेस में शामिल होना उनके और कांग्रेस पार्टी दोनों के लिये ही फायदे का सौदा है। नसीमु्द्दीन सिद्दीकी कद्दावर नेता हैं। ऐसे में वह जो भी नुकसान करेंगे वो बसपा और समाजवादी पार्टी का ही करेंगे।
मायावती पर लगाये थे गंभीर आरोप
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर 50 करोड़ रुपये मांगने के आरोप लगाये थे। इसके संबंधित उन्होंने कुछ टेप भी जारी किये थे। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के आरोप पर पलटवार करते हुए मायावती ने विधानसभा चुनाव में हार के लिए उन्हें ही जिम्मेदार बताया था। मायावती ने कहा था कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी पैसा उगाहने वाला ब्लैकमेलर शख्स है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक करियर
नसीमुद्दीन सिद्दीकी बांदा जिले के सेवरा गांव के निवासी हैं। वॉलीबॉल खेलना उनकी हॉबी था। वॉलीबॉल के वह में नेशनल लेवल के खिलाड़ी भी रह चुके हैं। 1988 में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपना राजनीतिक करियर बसपा के साथ शुरू किया था। वह 1991 में पहली बार MLA चुने गये। 1993 में हार का सामना करना पड़ा। 1995 में मायावती की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। वर्ष 1997 और 2002 में भी मंत्री रहे। 2007 से में भी नसीमुद्दीन सिद्दीकी मायावती सरकार में मंत्री बने। नसीमुद्दीन सिद्दीकी 29 साल तक बसपा में रहे। मई 2017 में मायावती ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
Updated on:
22 Feb 2018 04:48 pm
Published on:
22 Feb 2018 03:15 pm
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