
Women unable to be mothers Study on PCOS and Mensuration
आधुनिक जीवनशैली के चलते आज हर तीसरी किशोरी मेटाबॉलिक सिंड्रोम यानी पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) का शिकार होने लगी है। इससे किशोरियों पर बांझपन का खतरा मंडराने लगा है। यही नहीं, पीसीओएस की वजह से ही महिलाओं के 45 नहीं, 35 साल की उम्र में ही मां बनने पर ब्रेक लगने लगा है। इसका खुलासा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की स्टडी में हुआ है।
इस स्टडी में 12-18 साल उम्र की 185 किशोरियों को भी शामिल किया गया, जो विभाग में अपनी समस्या लेकर आई थीं। अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी टेस्ट में एक तिहाई में पीसीओएस की पुष्टि हुई। 138 किशोरियों में यह बीमारी मध्यम से लेकर गंभीर स्टेज तक में मिली।
लड़कियों में मोटापा और तनाव
स्टडी में यह भी सामने आया कि 32 फीसदी किशोरियों में करियर का तनाव सबसे अधिक था। मोटापा सभी में बॉडी मॉस इंडेक्स (बीएमआई) के मानक को तोड़ता मिला। डॉक्टरों ने वजह तलाशी तो पता चला कि इनमें अधिकतर किशोरियों ने जंक फूड का सात साल लगातार सेवन किया है। गंभीर स्टेज पर पहुंच चुकी किशोरियां शारीरिक श्रम या व्यायाम बिल्कुल नहीं करती थीं।
यह भी सामने आया
स्टडी में डॉक्टरों ने ओपीडी में आ रही उन 20 युवतियों को भी शामिल किया, जो 35 साल की उम्र में ही मां नहीं बन पा रही थीं। डॉटा बेस्ड स्टडी में सामने आया कि उन्हें पीसीओएस हुआ था लेकिन कुछ महीने बाद इलाज बंद कर दिया। उन्हें आईवीएफ का सहारा लेने का सुझाव दिया गया।
ये लक्षण सभी में मिले
- हॉर्मोन असंतुलन से ओवरी में सिस्ट बन चुका था, एस्ट्रोजेन हॉर्मोन काफी बढ़ा था
- ओवरी अपने मूल काम से भटक कर असयंमित स्थिति में काम करने लगी
- 70 फीसदी किशोरियों के चेहरे पर मुंहासे जैसे दाने और अनचाहे बालों में बढ़ोतरी
पीसीओएस के कारण
महिलाओं में पीसीओएस के तमाम कारण हैं। इसमें आधुनिक बेकाबू जीवनशैली, खान-पान, मानसिक तनाव और शारीरिक श्रम या एक्सरसाइज का अभाव मुख्य है।
ऐसे कर सकतीं बचाव
-भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने लिए कुछ समय निकालें और स्वास्थ्य पर ध्यान दें
-कहीं भी कुछ भी खाने की आदत छोड़ें, खासकर जंक फूड एकदम ही बंद कर दें
-वजन पर काबू पाएं, इसके लिए एक्सरसाइज और डायटीशियन की मदद ले सकती हैं
-तनाव को अपने पास भी न फटकने दें, इससे बचने के लिए हरसंभव प्रयास करें
क्या बोलीं डॉक्टर
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज स्त्री रोग विभाग की हेड प्रो.किरन पांडेय के अनुसार हालात खराब हो रहे हैं। हर कोई पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम को हल्के में ले रहा है। बांझपन के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदार यह बीमारी है। इसे लेकर जागरूकता की जरूरत है, अन्यथा आने वाले सालों में मां बनने का सपना भी प्रभावित होगा।
Updated on:
12 Jun 2022 12:41 pm
Published on:
12 Jun 2022 12:32 pm
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