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Environment Day 2018: प्रकृति और पर्यावरण का दुश्मन प्लास्टिक, इस तरह बन सकता है जान का दुश्मन

पर्यावरण का दुश्मन है प्लास्टिक

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gbm

लखनऊ. पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है। परि यानी कि जो हमारे चारों ओर है और आवरण यानी कि जो हमें चारों ओर से घेरे हुए हैं। पर्यावरण को साफ सुथरा और सुरक्षित रखने की बात तो हर कोई करता है लेकिन आज के दौर में इस ख्याल पर प्लास्टिक पॉलयूशन भारी पड़ गया है। कितने ही ऐसे कारण हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। उन कारणों में से एक है प्लास्टिक, जो न केवल स्वच्छ जल को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि जीव जंतुओं के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है।

आम तौर पर रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का इस्तेमाल लोग कई चीजों के लिए करते हैं। प्लास्टिक के कप में चाय पीना, भोजन करना, पानी पीना। प्लास्टिक ऐसी चीज है, जिसमें हम तेजी से समा गए हैं। वो दिन दूर नहीं जब प्लास्टिक पॉलयूशन बम की तरह काम करे। प्लास्टिक से होने वाले नुकसान को लोग खूब समझते हैं लेकिन उसका इस्तेमाल भी खूब किया जाता है। इसी कारण इंसान खुद को और प्रकृति को पॉलयूशन की पिचकारी से ताबड़तोड़ कर रहा है।

ऐसे हुई थी प्लास्टिक की शरूआत

सबसे पहले प्लास्टिक प्राकृतिक सामग्री जैसे की प्राकृतिक रबर, कोलेजन और गैलालाइट से बनाया गया। सन 1857 में एडोल्फ स्पिटलर और विल्हेलम फिरस्क नाम के दो जर्मन रसायन शास्त्रियों ने ब्लैक बोर्ड के निर्माण के लेिए स्लेट का विकल्प ढूंढने का प्रयास किया। इस प्रयास में और बहुत से प्रयोगों के बाद प्लास्टिक की खोज हुई सानी कि प्लास्टिक जैसा एक पदार्थ मिला, जो कई इस्तेमाल में लाया गया।

आज प्लास्टिक का इस्तेमान लगभग हर छोटे बड़े काम के लिए किया जाता है। लेकिन ये आदत इतनी बढ़ चुकी है और इतनी बिगड़ चुकी है कि इस्तेमाल करने से लेकर कचरों में प्लास्टिक फेंकना हमारी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गया है।

प्लास्टिक से गंगा नदी बनी 'गंदा' नदी

प्लास्टिक को सिर्फ कचरे के डिब्बे में नहीं बल्कि गंगा में भी खूब फेंका जाता है। आलम ये है कि गंगा नदी अब गंदा नदी ज्यादा नजर आती है। जिस गंगा से भारत की पहचान है, उस गंगा को प्लास्टिक ने चारों ओर से घेर रखा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए पर्यावरण दिवस पर खास प्लास्टिक को त्याग कर गंगा नदी को सम्मान देने की बात कही है।

प्लास्टिक जान के लिए खतरा

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टॉक्सिकॉलजी रिसर्च, लखनऊ के एक साइंटिस्ट के अनुसार पानी में न घुल पाने और बायोकेमिकली एक्टिव न हो पाने की वजह से प्योर प्लास्टिक कम जहरीला होता है। लेकिन जब इसमें दूसरे तरह के प्लास्टिक और कलर मिलाए जाते हैं, तो यह नुकसानदेह साबित हो सकता है। इस तरह के खतरे को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने बच्चों के खिलौनों में प्लास्टिक के इस्तेमाल को सीमित कर दिया है।