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Oil Palm Cultivation: एक एकड़ में सवा लाख का मुनाफा, ऑयल पाम से आत्मनिर्भर हो रहे किसान

Oil Palm Cultivation: नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल–ऑयल पाम योजना के तहत किसान एक एकड़ में करीब 1.25 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।

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ऑयल पाम खेती (photo source- Patrika)

ऑयल पाम खेती (photo source- Patrika)

Oil Palm Cultivation: किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल–ऑयल पाम योजना महासमुंद जिले में सकारात्मक परिणाम दे रही है। इस योजना के तहत किसान अनुपयोगी और बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। वर्तमान में जिले के करीब 400 किसान लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती कर रहे हैं।

Oil Palm Cultivation: लगभग डेढ़ लाख रुपये की आमदनी

सरायपाली विकासखंड के भलेसर गांव के प्रगतिशील किसान मुकेश चंद्राकर इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में अपनी 33 एकड़ बंजर भूमि पर ऑयल पाम की खेती शुरू की और लगभग 1900 पौधे लगाए। शासन की योजना के तहत उन्हें पौधरोपण, फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई और रखरखाव के लिए अनुदान मिला। तीन-चार वर्षों बाद उत्पादन शुरू हुआ, जो लगभग 35 वर्षों तक निरंतर मिलता रहेगा। वर्तमान में वे एक पौधे से औसतन 3000 रुपये सालाना कमा रहे हैं और प्रति एकड़ करीब 1.25 लाख रुपये की आय प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने अतिरिक्त लाभ के लिए पाम के पौधों के बीच अंतरवर्तीय फसल के रूप में पहले केला लगाया, जिससे लगभग डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हुई।

फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रही

Oil Palm Cultivation: अब वे कोको की खेती कर निजी कंपनियों को बेच रहे हैं और अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। उनका मानना है कि कम पानी, कम उर्वरक और सीमित कीटनाशक उपयोग के बावजूद बेहतर उत्पादन मिलने से पाम खेती लाभकारी साबित हो रही है। उनके खेतों में दो दर्जन से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार भी मिला है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं। उद्यानिकी विभाग के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य देश को पाम ऑयल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, अनुदान और विपणन सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

जिले में पाम खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं और प्रशासन भी किसानों को इससे जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। पाम ऑयल का उपयोग खाद्य सामग्री, साबुन, शैंपू, कॉस्मेटिक्स और दवाओं में व्यापक रूप से होता है। कम लागत और अधिक लाभ देने वाली यह खेती जिले में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रही है।