
छत्तीसगढ़ में कमजोर पड़ा मॉनसून! चिलचिलाती धुप में हालत खराब(photo-unsplash)
CG Monsoon 2025: छत्तीसगढ़ में 28 मई को मानसून की इंट्री होने सप्ताहभर बाद भी मैदानी इलाके में मानसून नहीं पहुंच पाया है। मानसून दक्षिण छत्तीसगढ़ में ही कमजोर पड़ गया है। इधर, मानसून का जिले के किसान इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अगले हफ्ते मानसून पहुंच सकता है।
इस वर्ष छत्तीसगढ़ में मानसून 13 दिन पहले ही पहुंच गया था। 31 मई को मानसून महासमुंद पहुंचने की संभावना थी, लेकिन चार जून हो चुके हैं, लेकिन अब तक मानसून की एंट्री नहीं हुई है। बंगाल की खाड़ी में एक नया सिस्टम बनने के बाद मानसून सक्रिय होगा। जिले में हफ्तेभर के बाद मानसून की एंट्री की संभावना है। फिलहाल, तीन दिन से बार-बार मौसम बदल रहा है। कहीं बादल, कभी धूप का खेल जारी है। दंतेवाड़ा में मानसून पहुंचने से महासमुंद जिले में मौसम में बदलाव आया और अच्छी बारिश हुई।
मौसम के मिजाज को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि इस बार मानसून से पिछले साल से जल्दी आएगा। मानसून की धीमी रफ्तार के कारण मौसम में फिर बदलाव आ गया है। अब तेज धूप पड़ रही है। उसमभरी गर्मी से लोग हलाकान हैं। फिलहाल, किसानों को मानसून आने का इंतजार है। क्योंकि, खेती-किसानी रुक गई है।
प्रतिवर्ष सामान्य रूप से मानसून 14 जून को पहुंचता है। इस वर्ष 8 जून के आस-पास पहुंचने की संभावना पूर्व में जताई गई थी। फिर कहा गया कि 31 मई को पहुंचेगा। मानसून की दस्तक के बाद जिले में खेती रफ्तार पकड़ेगी। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख वैज्ञानिक एसके वर्मा ने बताया कि 12-13 जून तक मानसून आने की संभावना है। इसके बाद ही मौसम में बदलाव आएगा।
इस साल नौ दिन का नौतपा बारिश में ही निकल गया। दो दिन ही गर्मी पड़ी। अमूमन देखा जाए तो नौतपा में गर्मी ज्यादा पड़ती है। एक-दो दिन मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। लेकिन इस बार बारिश में ही नौतपा निकल गया। लोगों को गर्मी का ज्यादा एहसास भी नहीं हुआ।
बारिश के बार किसान अपने खेतों को तैयार करने में जुट गए थे। लेकिन, मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से खेती-किसानी के लिए मानसून की दस्तक देने का इंतजार है। बताया जाता है कि मानसूनी सीजन में अच्छी बारिश हो सकती है। पिछले साल कम बारिश हुई थी।
जिले के जलाशयों की स्थिति ठीक नहीं है। कोड़ार और केशवा जलाशय में पांच-छह फीट की पानी बचा है। बांधों को भी मानसूनी बारिश का इंतजार है। इधर, हफ्तेभर तक रुक-रुककर हुई बारिश से वाटर लेवल में कुछ सुधार आया है। बंद पड़े नलकूपों में पानी आने लगा है। हालांकि, इतनी बारिश पर्याप्त नहीं है। तालाब भी सूखे पड़े हैं। नदी-नालों में भी पानी नहीं है।
जिले में खरीफ की फसल दो लाख 59 हेक्टेयर में लेने का लक्ष्य तैयार किया गया है। इसमें धान की फसल 2 लाख 46 हजार हेक्टेयर में ली जाएगी। इस बार दलहन और तिलहन की फसलों को लेने के लिए भी जोर दिया जा रहा है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एसके वर्मा ने बताया कि किसान खरीफ फसल की बोआई के पूर्व मिट्टी पलट हल का प्रयोग करें। उन्नत किस्म के बीज का प्रयोग करें।
ग्रीष्मकालीन उड़द व मूंग फसल तैयार हो जाने पर उसकी कटाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मानसून की एंट्री अभी महासमुंद में नहीं हुई है। अगले सप्ताह मानसून आ सकता है। इधर, किसान खाद व बीज के लिए मशक्कत कर रहे हैं। डीएपी खाद किसानों को उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
Published on:
05 Jun 2025 03:30 pm
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