
Bitiya At Work
महोबा. बुंदेलखंड के महोबा में देश के पहला रोटी बैंक को संचालक हाजी मुट्टन जनपद की वो शख्सियत हैं, जिन्हें समाजसेवा के लिए सभी धर्मों के लोग अपना आदर्श मानते हैं। हाजी मुट्टन पत्रिका के बिटिया@work मुहीम से खासे प्रभावित नजर आये। उन्होंने बेटियों के लिए पत्रिका द्वारा शुरू की गई मुहीम की खासी सराहना की है। उन्होंने इस मुहीम का हिस्सा बनते हुए अपने दो दोस्त और रोटी बैंक के सदस्य भगीरथ साहू की पुत्री प्रियंका और सलीम की पुत्री शाइस्ता को समाजसेवा करने और मानवता को ही परोपकार मानने की नसीहत दी। यहीं नहीं आज सुबह से ही दोनों ही बेटियों और उनकी सहेलियों को साथ लेकर रोटी बैंक के रोजमर्रा काम को भी अंजाम दिया। दोनों बेटियां भी रोटी बैंक में भागीदारी कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। आज उन्होंने नगर के कई घरों में जाकर रोटी इकट्ठा की और गरीबों, मजलूमों और भूखों तक को खाना पहुंचाया।
क्या है रोटी बैंक-
दैवीय आपदाओं का दंश झेल रहे बुंदेलखंड की बदहाली से भला कौन वाकिफ नहीं है। महोबा में पिछड़ेपन और सूखे के हालातों से चलते यहाँ के युवा और किसान कर्ज और मर्ज की वजह से मौत को गले लगाने के लिए मजबूर हैं। यहाँ की भुखमरी का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि दो सौ लोगों के खाने का इंतजाम रोटी बैंक करता है। शहर के रोडवेज परिसर, प्राइवेट बस स्टैंड, जिला अस्पताल और नगर के सभी चौराहों सहित कई कांशीराम कालोनियों में ऐसे लोगों को देखा जा सकता है जिन्हें दो वक्त की रोटी तक नहीं पा रही थी। ऐसे ही लोगों के लिए समाजसेवी हाजी मुट्टन ने अपने कुछ साथियों के साथ रोटी बैंक की शुरुआत की थी। तीन वर्ष पूर्व इस रोटी बैंक को शुरू किया गया था। शुरुआत में 30 से 35 घरों से दो रोटी लेने का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते आज तीन सौ घरों से रोटी आ रही है। इन रोटियों के पैकेट बनाकर गरीबों तक पहुंचाया जाता है। इस रोटी बैंक में शहर की 60 से अधिक युवा टीमें काम कर रही हैं। सुबह शाम टोलियां शहर के मुहल्लों में रोटी बैंक की आवाज लगाकर रोटी इकठ्ठा करती हैं और जरूरतमंद तक रोटी पहुंचाती हैं। पत्रिका की मुहीम बिटिया@WORK को भी रोटी बैंक का हिस्सा बनाने के लिए रोटी बैंक के संस्थापक हाजी मुट्टन ने अपने दोस्त भगीरथ साहू की पुत्री प्रियंका साहू और सलीम की बेटी शाईस्ता को रोटी बैंक के जरिये समाजसेवा के जज्बे को सिखाया।
बेटियों को भी सिखाएं समाजसेवा के गुण-
सुबह से ही दोनों बेटियों को साथ लेकर हाजी मुट्टन शहर के उन घरों में गए जहाँ से वो रोटी इकट्ठा करते हैं। बेटियों ने ही घरों के बाहर आवाज देकर रोटियों को इकट्ठा किया और उन्हें जरूरतमंदों तक पहुँचाया। बेटियां ये काम करते खासी उत्साहित नजर आईं। बेटियों ने समाजसेवा के गुण सीखे और उन्हें अपनाने की भी बता कहीं। दोनों ही बेटियों ने रोटी बैंक से जुड़कर आगे काम करने की भी इच्छा जताई है। हाजी मुट्टन बताते हैं कि उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि पत्रिका द्वारा बेटिया@WORK सप्ताह मनाकर बेटियों को आगे लाया जा रहा है। ये मुहीम न केवल सराहनीय है बल्कि समाज को एक सन्देश देने वाला भी है। मैं पत्रिका के इस अभियान से प्रभावित हूँ। मैंने इन दोनों ही बेटियों को आज यहां लेकर आया और उन्हें अपने रोजाना काम से अवगत कराया। अब ये रोटी बैंक के लिए काम करना चाहती हैं। भूखे को भोजन कराना ही सच्ची मानव सेवा है। अब ये बेटियां भी रोटी बैंक के काम में हिस्सा लेंगी। उन्होंने बताया कि 2015 में दुनिया का पहला रोटी बैंक शुरू किया गया। अब तक देश में 65 रोटी बैंक खुल चुके हैं। जल्द ही इंडोनेशिया में भी रोटी बैंक का उद्घाटन करने के लिए मैं जा रहा हूँ।
बेटियों ने सराह चच्चा का काम-
प्रियंका हाजी मुट्टन को चच्चा नाम से सम्बोधित करते हुए कहती हैं कि आज अचानक चच्चा घर आये और हमें रोटी बैंक के एक काम करने के लिए अपने साथ ले गए। बाद में फील्ड में ले गए और भूखों व गरीबों से मिलवाया। हमने उनके दर्द को जाना। आज हमने रोटी बैंक का काम भी किया और समाजसेवा के गुण भी सीखे। चच्चा की इस सीख से हमे बड़ी नसीहत मिली है। वहीं शाइस्ता बताती हैं कि आज हमने ये सीखा है कि जीवन में दिखावे से कुछ नहीं होता, बल्कि गरीबों की मदद करने से ही जीवन सफल होता है।
Published on:
28 Sept 2018 06:14 pm
