
How to get success
Success Mantra: ऐसा माना जाता है कि बहुप्रतिभाशाली लोगों को जिंदगी तथा कॅरियर में अधिक चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ता है, पर ऐसा कतई सच नहीं है, क्योंकि कॅरियर और लाइफ दोनों फ्रंट्स पर प्रतिभाशाली तथा कम प्रतिभाशाली लोगों को अपने अपने तरीकों से चुनौतियों के साथ संघर्ष करना पड़ता है। इन चुनौतियों के दौरान ही वे अपनी उन क्षमताओं और कौशल से रूबरू हो पाते हैं, जिनके बारे में शायद ही वे पहले कभी जानते हों। कई बार सामान्य चुनौतियां भी हम सभी को उस कौशल के प्रति जागरूक करती हैं, जिनसे हम अनभिज्ञ रहते हैं, इसलिए चुनौतियों का सामना आंखें खोल कर करना अच्छा है...
एक्सपट्र्स का कहना है कि मल्टीपल चैलेंजेज और मल्टीपल टैलेंट का परस्पर रिश्ता है। दोनों ही एक सफल व्यक्ति के जीवन के साथ जुड़े रहते हैं और समय-समय पर व्यक्ति को लचीला बनने, नपे-तुले जोखिम उठाने, अपने विगत कामों की समीक्षा करने तथा आगे बढऩे की प्रेरणा देकर रणनीति तय करवाते हैं।
इमोशंस जगाता है
चुनौती छोटी या बड़ी कैसी भी क्यों न हो, हर स्थिति में इमोशंस को झिंझोडक़र रख देती है। सफल से सफल व्यक्ति भी इमोशंस को काबू में करने की कोशिश करने लगता है, ताकि दूसरे उसकी कमजोरी और संघर्ष को न जान पाएं। ये उसे अधिक मजबूत भी बनाते हैं।
अपने-पराए की परख होना
सफलता की सीढिय़ों पर बहुत कम ही अच्छे तथा भरोसेमंद साथियों का पता लग पाता है, वहां सभी ‘शुगर कैंडी’ की तरह अपनापन दर्शाते हैं, लेकिन चुनौतियों के आते ही आपको अपने हितचिंतकों व फायदा उठाने वालों को पहचानने का अवसर मिलता है।
लचीलापन
कठिन परिस्थितियों में टैलेंटेड लोगों के एटीट्यूड की परीक्षा भी होती है, विषम परिस्थितियों में ही इंसान किसी भी पद पर क्यों न हो, वह पहले की तुलना में अधिक लचीला और विनम्र होने के लिए बाध्य होता है।
सुपर एक्टिवनैस बढ़ाए
सफलता के साथ मल्टीटैलेंट व्यक्ति भी एक ढर्रे पर जिंदगी जीने लगता है, पर जैसे ही चुनौतियों के बीच आता है, उसका ब्रेन खुद-ब-खुद एक्टिव से सुपर-एक्टिव मोड पर चलने लगता है और व्यक्ति कई उपायों से समस्या का समाधान खोजने का कौशल दिखा पाता है।
मनोबल
सामान्य रफ्तार पर जिंदगी आगे बढ़ती रहे, तो सफल व्यक्ति का मनोबल भी एक स्तर पर जाकर थम जाता है, वह प्रेरणाविहीन होने लगता है। ऐसे में छोटी चुनौती भी उसके सुप्त मनोबल को जगाकर लाइफ को गति देती है।
री-फ्रैमिंग कराता है
चुनौती से कई बार हमारे सोचने तथा समझने का नजरिया बदलता है। यह हमारी थिंकिंग कैपैसिटी की रीफ्रैमिंग करता है। इससे हम एक ही आइडिया को कई तरीकों से विकसित करने का कौशल भी पाते हैं और अपनी पुरानी सोच में धार लाने में कुशल बनते हैं।
सेल्फ डाउट परखना
चुनौती जैसे ही किसी भी व्यक्ति के सामने आती है, वह व्यक्ति को ‘सेल्फ डाउट’ में डालती है। हालांकि यह एक नकारात्मक पक्ष है, पर इसकी एक खूबी भी है, जिससे व्यक्ति अपनी कई क्षमताओं से परिचित हो पाता है।
समझ तथा कौशल
यह जरूरी नहीं है कि चुनौतियों का सामना करने के लिए किसी विशेष प्रकार के कौशल की दरकार हो। किसी भी चुनौती को सामान्य समझ और कौशल से ही निपटा जा सकता है, इसलिए संघर्ष हमारी समझदारी तथा अनुभव को हमेशा बेहतर बनाता है।
Published on:
13 Nov 2019 02:33 pm
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