
राजनीति का शुद्धिकरण होना बेहद जरूरी
मंडला. अभियान चाहे छोटा हो या बेहद विस्तृत परिप्र्रेक्ष्य में, असर जरूर छोड़ता है। उसकी न केवल चर्चा होती है बल्कि कहीं न कहीं वह आम जनता के एक हिस्से को प्रभावित अवश्य करता है। पत्रिका चेंजमेकर्स अभियान के बारे में जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राकेश तिवारी ने ये वक्तव्य दिए और चेंजमेकर्स अभियान के बारे में संक्षिप्त परिचय भी दिया। इस दौरान बार रूम में बैठे हर अधिवक्ता ने पत्रिका के चेंजमेकर्स अभियान के उद्देश्य और उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी लेने मेे उत्सुकता दिखाई और इस बात को स्वीकार किया कि संविधान में न्यायपालिका को लोकतंत्र का पहला स्तंभ माना गया है, जिसके चलते समाज को सही दिशा देने में अधिवक्ताओं की भूमिका न केवल महत्वपूर्ण है बल्कि उनका दायित्व भी अन्य की अपेक्षा अधिक है। चेंजमेकर्स नामांकन के लिए अनेक अधिवक्ताओं ने पत्रिका ऐप भी डाउनलोड किया और उसमें ऑन लाइन नामांकन कराया।
जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में स्थित बार रूम में १७ मई की दोपहर को आयोजित संगोष्ठी चर्चा का विषय बनी रही। देश की राजनीति के शुद्धिकरण के लिए पत्रिका द्वारा चलाए जा रहे चेंजमेकर्स- बदलाव के नायक अभियान से जिला अधिवक्ता संघ के अधिकांश अधिवकत रूबरू हुए और इस बात से सहमति जताई कि वाकई बदलते परिवेश और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए देश की राजनीति का शुद्धिकरण होना न केवल प्रासंगिक है बल्कि बेहद जरुरी भी है। चेंजमेकर्स अभियान की परिचर्चा में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राकेश तिवारी के अलावा सचिव देवाशीष झा, मुकेश सोनी, एके शुक्ला, नितिन मिश्रा, अजय शर्मा, अखिलेश मिश्रा, अशोक वर्मा, रवि ठाकुर, रजनीश रंजन उसराठे आदि उपस्थित रहे। नगर के जाने माने अधिवक्ता संजय चौरसिया ने चेंजमेकर्स अभियान को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि आज देश की राजनीति में जिस तरह का माहौल बनता जा रहा है। इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि समाज के ईमानदार, निष्पक्ष और बुद्धिजीवियों ने राजनीति से किनारा कर रखा है, इसका खामियाजा अंतत: पूरा देश भुगत रहा है। राजनीति के शुद्धिकरण की आवश्यकता जितनी अभी है शायद इससे पहले कभी नहीं थी। उनकी इस बात का समर्थन हर किसी ने किया कि देश में मताधिकार पूर्ण परिपक्व और समझदार लोगों को ही होना चाहिए। देश की जिस जनता को यह सिखाना पड़ रहा है कि खुले में शौच न जाएं, खाना खाने से पहले हाथ अच्छी तरह से धोएं, वे देश के लोकतंत्र के लिए किस तरह के प्रतिनिधियों को चुनकर संसद तक भेजेंगे यह बेहद शोचनीय है।
अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम का समय हो या आज का समय, अधिवक्ता हर संघ, समिति, संस्था में अपनी भूमिका निभा रहा है। चूंकि वह कानून का जानकार होता है इसलिए सभी उसके अनुभव और ज्ञान का लाभ ले रहे हैं। जरुरत है अब अधिवक्ता, किसी भी राजनीतिक पार्टी के प्रभाव में आए बिना पूर्ण निष्पक्षता से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें तभी देश की राजनीति का शुद्धिकरण शुरु हो पाएगा। ये बात और है कि उच्च राजनीतिक पदों पर बैठे अनेक अधिवक्ताओं के पास सिर्फ डिग्री है। कानून का वास्तविक ज्ञान और धरातल के वास्तविक अनुभवों से परिचित अधिवक्ताओं को राजनीति के शुद्धिकरण के लिए आगे आने की आवश्यकता है।
प्रचार-प्रसार पर अंकुश
अधिवक्ताओं में विशेष स्थान रखने वाले मनोज गुप्ता ने बताया कि राजनीति में चुनाव के दौरान प्रचार प्रसार का दायित्व सिर्फ एक ही संस्था को दिया जाना चाहिए ताकि वह हर कैंडिडेट का बराबर प्रचार प्रसार कर सके। इसका कारण बताते हुए मनोज ने कहा कि आज एक ईमानदार व्यक्ति समाज में प्रतिष्ठा तो रखता है लेकिन राजनीति में बिना प्रचार प्रसार के कदम रखने पर उसकी जमानत ही जब्त होगी। प्रचार प्रसार के खर्च से जब तक कैंडिडेट को मुक्त नहीं किया जाएगा तब तक राजनीति का शुद्धिकरण मुश्किल है। पार्टी भी उसी को टिकट देती है जो भारी भरकम चंदा वहन कर सके।

Published on:
18 May 2018 05:52 pm
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