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भीषण आग : देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक, फिर भी सुरक्षित नहीं, दूसरे जिले से आती है दमकल

-औद्योगिक क्षेत्र मनेरी की फैक्ट्री में आग-सनमुखा फैक्ट्री में लगी भीषण आग-फैक्ट्री में बनाई जाती हैं कृषि संबंधित दवाएं-दमकल दल देरी से पहुंचने से हुआ ज्यादा नुकसान

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भीषण आग : देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक, फिर भी सुरक्षित नहीं, दूसरे जिले से आती है दमकल

मंडला. मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्थित औद्योगिक क्षेत्र मनेरी की एक सनमुखा फैक्ट्री में शुक्रवार की शाम को भीषण आग लग गई। बताया जा रहा है कि, इस फैक्ट्री में पेस्टिसाइड्स, बायो फर्टिलाइजर, माइक्रो न्यूट्रिएंट सहित अन्य कृषि संबंधी उत्पाद बनाए जाते हैं। फिलहाल आग लगने का कारणों का तो अबतक खुलासा नहीं हो सका है। लेकिन, इसके भीषण रूप धारण करने का कारण समय पर दलकल दल न पहुंच पाना बताया जा रहा है।


आपको बता दें कि, देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद भी यहां फायर सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं है। यहां जब भी आग के हालात बनते हैं तो नजदीकी जिले जबलपुर से फायर बिग्रेड की मदद ली जाती है और अकसर फायर ब्रिगेड लेट पहुंचने की वजह से यहां हालात अधिक खराब हो जाते हैं।

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वरना होता बहुत सी जानों का नुकसान

ग़नीमत ये रहा कि, फैक्ट्री में काम करने वाले 25 कर्मी समय रहते बाहर निकल गए। सूचना पर निवास से फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी पहुंची, लेकिन आग तब तक विकराल रूप ले चुकी थी। जबलपुर से दो गाड़ी बुलानी पड़ी। तीन वाहनों से भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका। रात आठ बजे फोम का प्रयोग कर आग बुझाने का प्रयास शुरू हुआ। इस हादसे में लाखों रुपए के नुकसान होने की बात कही जा रही है।


विधायक का प्रशासन पर आरोप

मामले को लेकर विधायक डाॅ. अशोक मर्सकोले का कहना है कि उन्होंने कई बार फायर बिग्रेड की मांग को लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन उनका कहना है कि, अफसर इस गंभीर मामले को उदासीन तौर पर ले रहे हैं और इतना ज्यादा जरूरी होने के बावजूद भी फायर बिग्रेड वाहन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।


नहीं हैं सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम

औद्योगिक क्षेत्र के लोगों ने श्रम अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि, इन फैक्ट्रियों में दर्जनों की संख्या में मजदूर काम करते हैं, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा के यहां कोई प्रबंध नहीं हैं। फैक्ट्रियों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है। बता दें कि, इससे पहले पूर्व पदस्थ श्रम अधिकारी रिश्वतकांड में फंस चुके हैं। वहीं, वर्तमान में पदस्थ अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर नहीं हैं।