
मंगल सिंह ठाकुर
मंडला. मंडला के रहने वाले एक होनहार छात्र की सोच शादी ब्याह व अन्य पार्टियों में भोजन के स्टॉल में लगने वाली भीड़ को नियंत्रित कर रही है। अब लोगों को भोजन के पास तक नहीं जाना होता बल्कि भोजन उनके पास पहुंचता है। जिससे भीड़ नियंत्रित हो रही है और शांति पूर्वक कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं। जिले के अनुदीप श्रीवास्तव ने बैटरी से चलने वाली छोटी ट्रेन तैयार की है, जिसका इंजन अपने डिब्बों के साथ 130 किलो तक का वजन लेकर चल सकता है। अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने में छात्र को लगभग 2 साल लग गए। इस ट्रेन का अब वे व्यावसायिक उपयोग भी कर रहे हैं।
छात्र ने बनाई 'डिनर स्पेशल ट्रेन !'
मंडला के देवदरा के चुटका कॉलोनी रोड निवासी अनुदीप श्रीवास्तव ने अब तक इस तरह की चार ट्रेन का निर्माण किया है। जिसके लिए लगभग 2 लाख रुपए खर्च किए हैं। जुगाड़ के माध्यम से अनुदीप ने प्लाई में पटरी बनाई फिर उसमें रिमोट कंट्रोल से चलने के लिए ट्रेन के इंजन का निर्माण किया। इंजन के साथ डिब्बे लगाए। पहले 6 डिब्बे लेकर चलने वाली छोटी ट्रेन अब 32 डिब्बे लेकर चल सकती है। इसमें सलाद, भोजन रखकर लोगोंं को परोसा जा सकता है। इंजन की स्पीड आवश्यकतानुसार कम ज्यादा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस ट्रेन के 6 डिब्बों में 85 किलो तक सामग्री रखी जी सकता है।
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आईटीआई कर रहे अनुदीप
अनुदीप में सरकारी आईटीआई में इलेक्ट्रिक ट्रेड में दूसरे वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह 9वीं कक्षा से ही इस तरह की ट्रेन बनाना चाह रहे थे। कोरोना काल में इस पर काम शुरू किया। पिता अनिल श्रीवास्तव ने हिम्मत बढ़ाई और अनुदीप आगे बढ़ता गया। पिता ने वेल्डिंग मशीन, लोहा कटर, ड्रिल मशीन, एंगल ग्राइंडर, हैंड ग्राइंडर, लकड़ी कटर आदि मशीन खरीद कर दी। जिसके बाद हिम्मत बढ़ी और अनुदीप ने चार ट्रेन तैयार कर ली। अब दूसरे कम खर्च और आवश्यक चीजों पर कार्य कर रहा है। इन ट्रेनों की लंबाई 16-16 फीट है जो एक दूसरे के पीछे 64 फीट पटरी पर चलेगी। ये ट्रेनें 130-130 किलो वजन उठा कर चल सकती हैं। ट्रेनो का स्पीड भी कंट्रोल रहेगा ताकी एक दूसरे से टकराने की संभावना ना रहे। अनुदीप के पास ट्रेन के लिए बुरहानपुर, बालाघाट सहित क्षेत्रों से भी आर्डर आने लगे हैं। इंजन के पावर के लिए तीन बैटरी लगाई जाएगी। जो 5-6 घंटे लगातार चल सकती है। ट्रेन में गाना भी बजा सकते हैं।
भीड़ से छुटकारा देने के लिए आया आइडिया
अनुदीप ने बताया कि वह परिवार के साथ एक पार्टी में गए थे, लेकिन वहां बहुत अधिक भीड़ दी। लोगों को सलाद लेने के लिए काफी इंतजार करना पड़ रहा था। इसके बाद उन्होंने इस तरह की ट्रेन बनाने का मन बनाया। कक्षा नवमीं से अपने प्रोजेक्ट में काम करना शुरू कर दिया था। कोरोना काल में जब स्कूल बंद रहे तो वह समय प्रोजेक्ट को गति देने में लगा दिया। इससे सोशल डिस्टेंसिंग को भी को मेंटेन किया जा सकता है।
महिला सुरक्षा के लिए बनाए उपकरण
अनुदीप ने पिछले दो साल में नये-नये प्रोजेक्टों में काम किया है। महिला सुरक्षा को लेकर बनाए गए रोल व बैग शामिल हैं। महज दो-ढाई सौ रुपए खर्च कर महिलाओं को अप्रिय घटना से बचाने का प्रयास किया है। बैग व रोल में कुछ लोहे की सामग्री लगाकर इस लायक बना दिया है कि एक स्विच ऑन करते ही 2 हजार वोल्ट का झटका लगता है। बस, ट्रेन में सफर के दौरान या सुनसान क्षेत्र में छेड़छाड़ की स्थिति में इस उपकरण का आसानी से उपयोग कर अपनी सुरक्षा की जा सकती है।
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Published on:
09 Nov 2022 08:48 pm
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