
niwas vidhan sabha election result. निवास प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही निवास विधानसभा के चुनाव में सभी की नजर थी। यहां 2018 में मिली हार के बाद भाजपा ने केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को मैदान में उतारा था। लेकिन, सामने आए परिणामों ने भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बीजाडांडी पहुंचकर सीएम ने भी केंद्रीय मंत्री के पक्ष में सभा की थी। बाहर से भी कुछ प्रचारक निवास में आए थे। इसके बावजूद भी केंद्रीय मंत्री अपनी सीट नहीं बचा सके। पूर्व में निवास में कुलस्ते परिवार के सांसद, विधायक होने के बाद भी निवास को कोई बड़ी सौगात नहीं मिली, जिससे मतदाता नराज दिखे। चुटका और बसनिया बांध का विस्थापन व भविष्य में अनहोनी के डर के कारण विरोध चल रहा है, जिससे मतदाता कांग्रेस के पक्ष में मत किया। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में जब-जब आदिवासी मुख्यमंत्री की बात चलती है तो फग्गन सिंह कुलस्ते सबसे आगे रहते हैं।
क्षेत्र में सक्रियता जीत का आधार
नगर परिषद चुनाव में महिला के लिए अध्यक्ष पद आरक्षित होने के कारण चैन सिंह ने चुना नहीं लड़ा। लेकिन लोगों के संपर्क में हमेशा बने रहे। सामाजिक कार्यक्रमों में उपस्थिति और सहयोग के कारण लोगों के बीच पहचान बनाए हुए थे। इसके साथ ही मिलनसार हैं। पूर्व कार्यकाल में लोगों की मदद क्षेत्र का विकास कार्य करने का फायदा भी चैन सिंह को मिला।
अनुभव काम आया
चैन सिंह बरकड़े का राजनीतिक करियर भी काफी पुराना है। चैन सिंह बरकड़े तीन बार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत चुके हैं, एक बार जिला पंचायत उपाध्यक्ष और एक बार निवास नगर परिषद अध्यक्ष रहे हैं।यही इस बार की जीत में अनुभव उनके काम आया।
चुनाव हारने के बाद बोले फग्गन
फग्गन सिंह कुलस्ते ने चुनाव हारने के बाद कहा कि जनादेश को हम विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं। हार के कारण का पता लगाएंगे। मैं कार्यकर्ताओं और अपने सहयोगियों का आभार व्यक्त करता हूं। शुक्रवार 17 नवंबर को देर शाम तक 82.11 फीसदी मतदान हुआ था।
यह सीट महाकौशल की लकी सीट मानी जाती है। इसे संयोग कहा जाता है कि पिछले 50 सालों में जिस पार्टी ने यहां परचम लहराया है, उसकी राज्य में सहकार तक बनी है। यह सीट भी आदिवासी बहुल है। निवास सीट से मौजूदा विधायक डा. अशोक मर्सकोले के मंडला विधानसभा सीट से मैदान में उतारा था।
2018 के चुनाव की बात करें तो निवास विधानसभा सीट पर कुल 240277 मतदाताओं ने वोट डाले थे। कांग्रेस प्रत्याशी डा. अशोक मर्सकोले को 91007 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के राम प्यारे कुलस्ते को 62692 वोट मिले थे। हार-जीत का अंतर 28315 था।
इससे थोड़ा और पीछे देखे तो 2013 के चुनाव में यहां से भाजपा के प्रत्याशी राम प्यारे कुलस्ते जीते थे। 65 हजार 916 वोट उन्हें मिले थे, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार पतिराम पंद्रो को 55006 वोट मिले थे। हार जीत का अंतर 10910 था।
2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रामप्यारे कुलस्ते ने कुल 45 हजार 999 वोट हासिल किए थे और कांग्रेस उम्मीदवार पति राम पंद्रो को 42 हजार 350 वोट मिले थे। हार-जीत का अंतर 3649 था।
फग्गन सिंह कुलस्ते
64 साल के फग्गन सिंह पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार में इस्पात राज्यमंत्री हैं। 17वीं लोकसभा के सांसद हैं। 2009 से मंडला सीट का नेतृत्व किया है। कांग्रेस की मजबूत सीट होने के कारण भाजपा ने दिग्गज नेता को चुनाव में उतारा है।
चैन सिंह वरकड़े
51 साल के चैन सिंह वरकड़े एमए हिन्दी है। 1994 से 99 तक ग्राम कोहका के सरपंच रहे। 2005 से 09 तक जिला पंचायत उपाध्यक्ष भी रहे। 2017 से 22 तक एक बार निवास नगर परिषद अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्तमान में आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष हैं और क्षेत्र में अच्छी पकड़ होने के कारण कांग्रेस ने इन्हें टिकट दिया है।
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Updated on:
05 Dec 2023 08:15 am
Published on:
31 Oct 2023 03:46 pm
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