
health department outsource recruitment scam investigation (source-patrika)
Mandsaur Recruitment Scam: मंदसौर जिले में एक के बाद एक बड़े घोटाले सामने आ रहे है। पहले स्वामित्व योजना में नियमों के विपरीत पट्टे बांटे फिर उद्योग विभाग में नियमों के विपरीत सब्सिडी दे दी और अब स्वास्थ्य विभाग में 311 मल्टीवर्कर की पोस्टिंग को लेकर भारी भ्रष्टाचार किया गया है। यह आरोप लगाते हुए सुवासरा विधायक हरदीप सिंह डंग ने कलेक्टर को इसकी शिकायत की है। जिसके बाद कलेक्टर ने इसकी जांच के लिए एक जांच दल गठित कर दिया है। जिसमें पांच अधिकारियों को शामिल किया गया है। ये टीम इस मामले की जांच कर जांच प्रतिवेदन कलेक्टर अदिति गर्ग को देगें। उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
सीएमएचओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में आउटसोर्स पर सिविल अस्पताल से लेकर उपस्वास्थ्य केंद्र तक 311 पदों पर नियुक्तियां करना थी। इसमें सामुदायिक स्वास्थ्य जिले में पांच हैं। ऐसे में प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पांच-पांच नियुक्तियां करना थीं। इसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 41 हैं। इन 41 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पर एक-एक यानी कि 41 नियुक्तियां करना थीं। वहीं उपस्वास्थ्य केंद्र 176 हैं। प्रत्येक उपस्वास्थ्य केंद्र पर एक-एक पोस्टिंग करना थी। इसके अलावा सिविल अस्पताल छह हैं। एक सिविल अस्पताल में 11-11 पोस्टिंग करनी थीं।
सीएमएचओ कार्यालय के सूत्रों की मानें तो आउटसोर्स पर मल्टीवर्करों की पोस्टिंग के लिए कलेक्टर ने केवल 25 फीसदी पदों पर नियुक्ति करने के लिए निर्देश दिए थे। यानी कि जिले में 311 पदों में से केवल 66 पदों पर नियुक्ति करना थीं। इसमें केवल प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पद थे। लेकिन उपस्वास्थ्य केंद्र तक कर दिए गए। वहीं जब अधिकारियों से पूछा तो उन्होंने कहा कि सभी की परमिशन दे दी थी। उसके बाद पोस्टिंग की है।
विधायक हरदीप सिंह डंग ने कलेक्टर को की शिकायत में लिखा कि मंदसौर जिले में मप्र शासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति अनुबंधित कंपनी द्वारा की जा रही है। मंदसौर जिले में पुख्ता प्राप्त जानकारी के अनुसार सीएमएचओ के रिश्तेदार जयदीप द्वारा कुछ व्यक्तियों का गिरोह बनाकर उनके माध्यम से सीधे-सीधे व्यक्तियों से मोटी राशि लेकर बिना आदेश के अस्पताल के कार्य के लिए डॉक्टरों पर दबाव बनाकर उन्हें कार्य करने के लिए आदेशित किया जा रहा है। इन फर्जी नियुक्तियों के प्रकरण में सुक्ष्मता से जांच की जाए। इस गिरोह में सम्मिलित व्यक्तियों और संरक्षण देने वालों को चिंहित कर जालसाजी करने वालों पर कार्रवाई की जाए।
इस मामले में कलेक्टर अदिति गर्ग ने पांच अधिकारियों का एक जांच दल बनाया है। इसमें नगर पालिका सीएमओ अनिता चिकोटिया, अतिरिक्त सीईओ जिला पंचायत रामप्रताप सिंह पंवार, जिला कोषालय अधिकारी सुनिल डावर, लेखाधिकारी जिला पंचायत सुरेश भारती और डीईजीएम वैभग बैरागी शामिल हैं।
Updated on:
07 Jun 2026 07:06 pm
Published on:
07 Jun 2026 07:00 pm
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