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कच्चे तेल के बंदरबाट में जाने भारत को क्या हो सकते हैं फायदे

अमरीका में आॅयल रिग्स की बढ़ती संख्या को देखकर लगर रहा है भारत में भी पेट्रोल-डीजल के अच्छे दिन आने वाले हैं।
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Petrol-Diesel Price

नर्इ दिल्ली। एक तरफ देश में बढ़ते पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम को लेकर हाहाकर मचा हुआ है वहीं दूसरी तरफ अमरीका में आॅयल रिग्स की बढ़ती संख्या को देखकर लगर रहा है भारत में भी पेट्रोल-डीजल के अच्छे दिन आने वाले हैं। दरअसल एक अमरीकी संस्था ने अपने तरफ से जारी किए आंकड़ें में दावा किया है कि अमरीका में कुल आॅयल रिग्स की संख्या पिछले तीन साल के अपने उपरी स्तर पर जा पहुंची है। इस संस्था का नाम बेकर हग्स है।


अमरीका में तेजी से बढ़ रहे आॅयल रिंग्स

बेकर हग्स ने 11 मर्इ को अपने तरफ से जारी किए अांकड़ें में दावा किया है कि अमरीका में आॅयल रिग्स की कुल संख्या बढ़कर 844 हो गर्इ है। ये संख्या 13 मार्च 2015 के बाद से सबसे उपरी स्तर पर है। बता दें कि अमरीका काफी लंबे अर्से से अपने यहां कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाने में लगा है। इसका अंदाजा सिर्फ इसी से लगाया जा सकता है कि बीते दो साल में अमरीका में कुल आॅयल रिग्स की संख्या में 167 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। हालांकि मर्इ 2016 में इनकी संख्या घटकर मात्र 316 हो गया था, लेकिन एक बार फिर इसमें उछाल देखने को मिल रहा है। ये बात भी ध्यान देने वाली है कि ठीक चार साल पहले अमरीका में आॅयल रिग्स की संख्या 1600 से उपर थी।


अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार में वर्चस्व कायम करना चाहता है अमरीका

अमरीका में तेजी से बढ़ते आॅयल रिग्स का मतलब ये है कि यहां तेल उत्पादन में भारी बढ़ाेतरी देखने को मिलेगी। इसके बाद अमरीका से कच्चे तेल की निर्यात भी बढ़ेगा, आैर इस तरह से अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार पर अमरीका अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश करेगा। यदि एेसा होता है तो इसका सीधा असर सउदी अरब आैर रूस जैसे कच्चे तेल के बड़े निर्यातकों पर भी पड़ेगा।


दूसरे तेल निर्यातकों पर बढ़ेगा दबाव

अगर अमरीका, सउदी अरब आैर रूस के तेल उत्पादन को देखते हैं तो अमरीका रोजान 100 लाख बैरल से उपर का तेल उत्पादन करता है। वहीं रूस राेजाना 110 लाख बैरल आैर सउदी अरब 106 लाख बैरल उत्पादन करता है। ये दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में से एक है। इसी को देखते हुए अमरीका इस बाजार को कब्जाने की कोशिश में लगा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2019 में अमरीका अपने यहां कच्चे तेल की उत्पादन को बढ़ाकर 120 लाख बैरल प्रति दिन कर लेगा। अमरीकी तेल उत्पादन के बाद रूस आैर सउदी अरब जैसे देशों पर भी उत्पादन का दबाव बढ़ जाएगा। जिसके इन देशों के बीच निर्यात को लेकर प्राइस वाॅर की भी संभावना बढ़ जाएगी। एेसा हुआ तो कच्चे तेल के दामों में गिरावट देखने को मिल सकता है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम में कमी देखने को मिल सकता है।


पहले भी हो चुका है भारत को फायदा

इसके पहले साल 2014 में जब अमरीका में कुल आॅयल रिग्स की संख्या 1600 के पार था तो उस रूस आैर सउदी अरब ने भी तेल उत्पादन को बढ़ा दिया था। आैर इस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिला था। एेसे में मौजूदा समय में अमरीका में बढ़ते तेल उत्पादन को देखते हुए ये कयास लगाया जा सकता भारतीय बाजार में भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कमी हो सकती है।