
नई दिल्ली।बजट 2019 ( budget 2019 ) शुक्रवार को देश के सामने पेश हो गया। किसी के हिस्से खुशियां आईं और किसी को गम नसीब हुआ। वहीं दूसरी ओर मार्केट में निवेशकों को जो मिला वो गम के अलावा कुछ नहीं था। सेंसेक्स ( sensex ) में 395 अंकों की गिरावट देखने को मिली। साथ ही निवेशकों को 2.22 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया। अगर बात मोदी कार्यकाल के सभी बजट वाले दिनों में मार्केट का विश्लेषण करके देखें तो कभी भ्रम की स्थिति ही देखने को मिली है। जिसकी वजह से कभी निवेशकों के हिस्से में खुशी आई है तो कभी गम। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर मोदी कार्यकाल के बजटों में मार्केट की चाल किस तरह की देखने को मिली।
इस बार हुआ निवेशकों को नुकसान
किसानों और गरीबों को तोहफे देने वाले इस बजट में शेयर मार्केट के निवेशकों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। सेंसेक्स करीब 396 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स के मार्केट कैप की बात करें तो 1,51,35,495.86 करोड़ रुपए था। जबकि एक दिन पहले 4 जुलाई को बीएसई बंद होने के बाद मार्केट कैप 1,53,58,075.53 करोड़ रुपए था। दोनों दिनों के मार्केप कैप के अंतर को देखें तो 2.22 लाख करोड़ रुपए है। यही निवेशकों का नुकसान है। मतलब साफ है कि मोदी 2.0 को यह पहला बजट निवेशकों को बिल्कुल भी रास नहीं आया।
2014 से 2018 तक कभी खुशी, कभी गम जैसी स्थिति
अगर बात पीएम मोदी के पहले कार्यकाल के पांच बजटों को देखें तो शेयर मार्केट निवेशकों के लिहाज से कभी खुशी कभी गम जैसी स्थिति रही है। 2014 में सेंसेक्स में 10 जुलाई को पूर्ण बजट आने के बाद 69 अंकों की गिरावट देखी गई थी। जबकि 28 फरवरी 2015 को जब बजट पेश किया गया तो उस दिन शेयर बाजार बंद था। ऐसे में दो दिन बाद जब मार्केट खुला तो 239.02 अंकों की बढ़त की साथ बंद हुआ था। जानकारों की मानें तो बजट के असर की वजह से मार्केट में बढ़ोतरी देखने को मिली थी। 29 फरवरी 2016 को बजट के दिन 152.30 अंकों की गिरावट देखने को मिली थी। 2017 में 485.68 अंकों की बढ़त और 2018 में 58.36 अंकों की गिरावट देखने में आई थी। खास बात ये है कि 2017 से बजट 1 फरवरी से पेश किया जा रहा है।
पीएम मोदी के 6 बजटों में शेयर बाजार का हाल
| साल | सेंसेक्स में बढ़त एवं गिरावट ( अंकों में ) |
| 2014 | -69 |
| 2015 | 239.02 |
| 2016 | -152.30 |
| 2017 | 485.68 |
| 2018 | -58.36 |
| 2019 | -396 |
बजट में भ्रम से फंसता है शेयर बाजार
एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटीज एंड रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट अनुज गुप्ता के अनुसार इस बार बजट में किस तरह की घोषणाओं की उम्मीद की जा रही थी, वो नहीं हुई। रक्षा बजट को भी कुछ ज्यादा नहीं दिया गया। वहीं शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के खर्चों में भी लगाम नहीं लगाई गई। जिसकी वजह से मार्केट में निवेशकों को लॉस हुआ है। वहीं उन्होंने बीते बजटों के बारे में कहा कि मोदी सरकार में कभी बजट स्पष्ट नहीं रहा। जिसकी वजह से कभी गिरावट और कभी बढ़त देखने को मिली है।
मजबूत हुआ मार्केट
वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार में मार्केट में मजबूती देखने को मिली है। निवेशकों में मार्केट रुपया लगाने में संकोच की भावना कम नहीं हुई है। उसका सबसे बड़ा कारण है देश में मजबूत और स्थिर सरकार। 2014 से 2019 तक सेंसेक्स में 14,141 अंकों की मजबूती देखने को मिली है। इसका मतलब यह हुआ है कि 2014 से अब तब हर साल सेंसेक्स में करीब 3000 अंकों का फायदा हुआ है। 2014 में बजट वाले दिन सेंसेक्स 25,372.75 अंकों पर बंद हुआ था। वहीं 5 जुलाई 2019 को बजट वाले दिन सेंसेक्स 39,513.39 अंकों पर बंद हुआ है।
पांच सालों में कुछ इस तरह बढ़ा सेंसेक्स
| साल | बजट वाले दिन सेंसेक्स ( अंकों में ) |
| 2014 | 25,372.75 |
| 2015 | 29,459.14 |
| 2016 | 23,154.30 |
| 2017 | 28,141.64 |
| 2018 | 35,906.66 |
| 2019 | 39,513.39 |
44 हजार अंकों को पार कर सकता है सेंसेक्स
चुनाव से पहले सभी को उम्मीद लग रही थी सेंसेक्स 44 हजार अंकों पर जा सकता है। यह उम्मीद तब और जग गई जब चुनाव परिणामों में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिलता देख सेंसेक्स पहली बार 40 हजार के अंकों को पार गया। वैसे बीते एक महीने में 40 हजार अंकों को पार करने का मौका सेंसेक्स चार से पांच बार मिला है। लेकिन फिर से जानकारों कहना है कि अभी ग्लोबली स्लो डाउन का दौर चल रहा है। वहीं ट्रेड वॉर की स्थिति भी चल रही थी। जैसे ही निगेटिव मार्केट से गायब होंगी, वैसे ही सेंसेक्स 44 हजार के अंकों की ओर भागना शुरू कर देगा।
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Updated on:
06 Jul 2019 02:25 pm
Published on:
06 Jul 2019 02:08 pm
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