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Diwali 2021 : यहां तप मुद्रा में विराजमान हैं महालक्ष्मी, दिवाली के दिन दर्शन करने से होती है धन-धान्य की प्राप्ति

Diwali 2021 : वृंदावन में यमुना के किनारे स्थित महालक्ष्मी जी का एक ऐसा मन्दिर (Mahalaxmi Temple Belvan) भी है। जहां लक्ष्मी जी स्वयं भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishana) की तपस्या में लीन हैं। महालक्ष्मी तपस्थली के रूप में विख्यात बेलवन नामक इस स्थल पर दिवाली के दिन विशेष पूजा का महत्व है। मान्यता है कि यहां महालक्ष्मी की पूजा करने से धन की प्राप्ति होती है।

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मथुरा

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lokesh verma

Nov 03, 2021

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मथुरा. Diwali 2021 : वृंदावन में यमुना के किनारे स्थित महालक्ष्मी जी का एक ऐसा मन्दिर (Mahalaxmi Temple Belvan) भी है। जहां लक्ष्मी जी स्वयं भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishana) की तपस्या में लीन हैं। महालक्ष्मी तपस्थली के रूप में विख्यात बेलवन नामक इस स्थल पर दिवाली के दिन विशेष पूजा का महत्व है। दूर-दराज से हजारों लोग यहां आकर विधि-विधान से लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि यहां महालक्ष्मी की पूजा करने से धन की प्राप्ति होती है।

भगवान श्री कृष्ण की लीला भूमि ब्रजमंडल में आज भी हजारों वर्ष पुराने ऐसे स्थल हैं, जो भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं से किसी ना किसी रूप में जुड़े हुए हैं। लक्ष्मी जी की तपस्थली बेलवन भी कृष्ण की महारासलीला से जुड़ा स्थल है। कहा जाता है कि भगवान श्री राधा कृष्ण के महारास में हिस्सा लेने के लिए बैकुंठ से चलकर स्वयं लक्ष्मी जी यहां आई थीं। मगर, उन्हें महारास तो दूर वृंदावन में ही प्रवेश नहीं मिला। इसी से व्याकुल होकर लक्ष्मी जी वृन्दावन के पूर्वी छोर पर यमुना के किनारे तपस्या करने लगीं। उस स्थान को आज वेलवन के नाम से जाना जाता है। वेलवन स्थित महालक्ष्मी के मंदिर के सेवायत पुजारी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि आज भी लक्ष्मी जी हाथ जोड़कर भगवान श्री राधा कृष्ण की आराधना में लीन हैं। समूचे ब्रज मंडल में लक्ष्मी जी का एकमात्र यही प्राचीन मंदिर है। मंदिर में लक्ष्मी जी हाथ जोड़े विराजमान हैं। बराबर में लड्डू गोपाल बिराजमान हैं। मान्यता है कि इस स्थान पर जो भी भक्त लक्ष्मी जी की सच्चे मन से पूजा अर्चना करता है। उसकी सभी मनोकामनाएं लक्ष्मी जी पूर्ण करती हैं।

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दिवाली के दिन पूजा का खास महत्व

पुजारी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मंदिर में हर गुरुवार को भक्तों की खासी भीड़ होती है। इस खास संयोग के चलते यहां देश के कोने-कोने से आए हजारों भक्त वृंदावन से पैदल चलते हुए मां लक्ष्मी जी के इस बेलवन स्थित मंदिर में पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं। पूजा करने आए भक्तों ने यहां की महिमा बताते हुए कहा कि दीपावली के दिन इस स्थान पर पूजा करने का खास महत्व है। कहा जाता है कि यहां साढ़े पांच हजार साल तक महालक्ष्मी जी तप कर रही हैं।

साढ़े 5 हज़ार साल पुराना कल्पवृक्ष

पुजारी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मंदिर के ऊपर एक कल्पवृक्ष है और यहीं बैठकर माता लक्ष्मी तप करती हैं। यह वृक्ष भी साढ़े 5 हज़ार साल पुराना है। वृक्ष के एक तरफ मां लक्ष्मी जी के चरण बने हुए हैं, जो भी सच्चे मन से इस मंदिर में आकर पूजा अर्चना करता है, महालक्ष्मी उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

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By- Nirmal Rajpoot