
Lathmar Holi Barsana: लट्ठमार होली हर साल फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को खेली जाती है। पहले लट्ठमार होली बरसाने में ही खेली जाती है और उसके बाद नंदगांव में होती है। माना जाता है कि इस लट्ठमार होली की परंपरा 17वीं शताब्दी से चली आ रही है।
लट्ठमार होली की इस परंपरा में नंदगांव की महिलाएं ब्रज के पुरुषों पर लाठी से मारती हैं और बचने के लिए ढाल का प्रयोग करते हैं। यह होली इतनी प्रसिद्ध है कि इसे देखने के लिए देश और विदेश से लोग आते हैं।
नंदगांव और ब्रज के लोग लट्ठमार होली को उत्साह से मनाते हैं। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक पोशाक पहनती हैं। आइए आज हम आपको ब्रज की फेमस लठमार होली से जुड़ी ही कुछ खास बात बताते हैं।
होली का त्योहार आमतौर पर एक या दो दिन तक मनाया जाता है, लेकिन ब्रज में 40 दिनों तक होली खेली जाती है। बरसाना, वृंदावन, मथुरा और नंदगांव में अलग-अलग तरीकों से होली खेली जाती है। यहां 40 दिनों तक सभी भक्त राधा रानी और श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन देखने मिलते हैं।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब श्रीकृष्ण राधा रानी के साथ होली खेलने के लिए बरसाना आया करते थे, तो वो राधा रानी और उनकी सखियों के साथ हंसी-ठिठोली करते थे। तब राधा रानी और उनकी सखियां श्रीकृष्ण के पीछे लाठी लेकर भागती थीं। इसी के बाद से बरसाने में लट्ठमार होली की परंपरा शुरू होई और आज भी यहां पर लट्ठमार होली खेली जाती है।
हर साल लट्ठमार होली खेलने के लिए नंद गांव से पुरुष बरसाना आते हैं। यहां महिलाएं उन पर लाठियां बरसाती हैं। वहीं, पुरुष बचने की कोशिश करते हैं। इस बार 19 मार्च को नंद गांव में लट्ठमारठमार होली खेली जाएगी।
Updated on:
19 Mar 2024 11:22 am
Published on:
19 Mar 2024 09:36 am
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