26 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बार-बार जमानत की याचिका लगा रहा था कैदी, नहीं मिली तो जेल के अंदर ही कर ली आत्महत्या

Mathura District Jail suicide case : एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत बंद कैदी सुरेश ने मथुरा जिला जेल के शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश की।

2 min read
Google source verification

मथुरा जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने दी जानकारी, PC- IANS

मथुरा : मथुरा की जिला जेल से एक घटना सामने आई है। यहां एक कैदी ने जमानत की याचिका दायर की थी। लेकिन, कैदी को जमानत न मिल सकी। कैदी ने इस बात से आहत होकर आत्महत्या की कोशिश की। जेल से उसे इलाज के लिए लेकर जाया गया। लेकिन, इलाज के दौरान कैदी की मौत हो गई।

मृतक की पहचान सुरेश, गोवर्धन थाना निवासी के रूप में हुई है, जो एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले में मई 2025 से जिला कारागार में बंद था। जानकारी के अनुसार, बुधवार की देर रात करीब 2 बजे सुरेश शौचालय गया, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं लौटा। करीब दस मिनट बाद ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों को संदेह हुआ, जिस पर उन्होंने शौचालय का दरवाजा खोला।

शौचालय में कैदी ने लगाई थी फांसी

अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए। सुरेश ने अपने लोअर को गेट की कुंडी में बांधकर फांसी लगा ली थी। आनन-फानन में उसे नीचे उतारकर जेल अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया और गुरुवार तड़के इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि सुरेश लंबे समय से जमानत नहीं मिलने के कारण मानसिक तनाव में था। परिजनों ने उसकी जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील भी की थी, लेकिन 24 मार्च को भी उसका मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सका। घटना से पहले उसने अपने पिता से बात कर नाराजगी जताई थी। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पूरी घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

जिला अस्पताल में हो गई कैदी की मौत

मामले को लेकर जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया कि बीते बुधवार रात करीब 2 बजे एक बंदी द्वारा बंद बैरक में फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की गई। रात में बंदी सुरेश जब शौचालय गया, तब करीब 10 मिनट तक वह वापस नहीं आया। ऐसे में बैरक के अंदर मौजूद जो रात्रि पहरेदार थे, उन्होंने उसे जाकर देखा तो पाया गया कि बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश की है। पहरेदारों ने तुरंत इस घटना की सूचना जेल के बाहर तैनात सिपाही को दी, और सिपाही ने अन्य अधिकारियों को इस बात की सूचना दी। उस समय बंदी की सांसें चल रही थी। तुरंत उसे मथुरा के जिला कारागार अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद कैदी की स्थिति नाजुक होने के कारण उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया और वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

3-4 वकील बदले…लेकिन नहीं मिली जमानत

मामले की जांच पड़ताल में पता चला कि 24 मार्च को मृतक सुरेश की हाई कोर्ट में पेशी थी, लेकिन फाइल नंबर पर न आ पाने के कारण वह परेशान था। जांच में पता चला कि पिछले एक साल में मृतक कैदी ने 3 से 4 वकील बदले थे। वहीं, जब हमने उसके पीसीओ के कॉल रिकॉर्ड को चेक करवाया, तो पता चला कि 25 मार्च की सुबह उसने अपने पिता से बात की थी। पिता से बात करने के दौरान वह बार-बार यह अनुरोध कर रहा था कि वकील की पैरवी उसके अनुसार हो और अच्छे से पैरवी करे।

उन्होंने बताया कि बंदी के अंदर बेल न हो पाने के कारण मायूसी थी। हालांकि, पुलिस घटना के पीछे की वजह और जांच-पड़ताल में जुटी है।