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500 वर्ष पुराना है मुड़िया पूनौ का इतिहास, पढ़िए पूरी जानकारी

शकाब्द 1476 में हुआ था श्रीपाद सनातन गोस्वामी का निधन, संतों ने सिर मुड़ाया और नाम हो गया मुड़िया पूनौ, सोमवार से शुरू होकर गुरु पूर्णिमा तक चलेगा मेला

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mudiya mela

गोवर्धन चक्लेश्वर स्थित भजन कुटीर में विराजमान श्रीपाद सनातनगोस्वामी जी महाराज

मथुरा/गोवर्धन। मुड़िया पूर्णिमा का प्रसिद्ध नाम मुड़िया पूनौ है। तीन दिन तक चलने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। गिरिराज जी की परिक्रमा करते हैं। मुड़िया मेला सोमवार से शुरू हो रहा है, जो गुरु पूर्णिमा यानी 27 जुलाई तक चलेगा। मुड़िया पूनौ श्रीपाद सनातन गोस्वामी की याद में मनाई जाती है। मुड़िया पूर्णिमा संतों ने अपने गुरू श्रीपाद सनातन गोस्वामी की याद में सिर मुंडन कराकर मुड़िया पूर्णिमा पर पांच दिवसीय भजन संकीर्तन कर शोभायात्रा निकालते हैं।

श्रीपाद सनातन गोस्वामी की स्मृति
गुरु पूर्णिमा यानि व्यास पूर्णिमा गुरु भक्ति को समर्पित पर्व है। आज भी भारतीय सनातन संस्कृति में देश भर में गुरु पूजा की जाती है, लेकिन गोवर्धन में आषाढ़ मास की पूर्णमासी चैतन्य महाप्रभु के शिष्य गुरु श्रीपाद सनातन गोस्वामी की स्मृति में मनायी जाती है। आज भी करीब पांच सौ साल पुरानी पंरपरा में गौड़ीय सम्प्रदाय के साधु-संत व ब्रजवासी सनातन गोस्वामी के महाप्रयाण को लेकर परिक्रमा करते हुए शोभायात्रा निकालते हैं।

कुटीर में रहकर हरिनाम कीर्तन और गिरिराज महाराज की परिक्रमा किया करते थे

अब से लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व सनातन गोस्वामी ने ब्रज मंडल के लुप्त धार्मिक स्थलों की खोज व उनके महत्व के बारे में बताया था। उनका तिरोभाव शकाब्द 1476 में हुआ था। श्रीपाद सनातन गोस्वामी महाराज प्रतिदिन चक्लेश्वर स्थित चैतन्य महाप्रभु जी बैठक के समीप भजन कुटीर में रहकर हरिनाम कीर्तन और गिरिराज महाराज की परिक्रमा किया करते थे। आषाढ़ मास की पूर्णमासी को उनका देहावसन हो गया तो समूचे ब्रज में शोक की लहर दौड़ गई। गौड़ीय सम्प्रदाय के साधु-संतों और ब्रजवासियों ने सिर का मुंडन कर उनके पार्थिव शरीर को लेकर परिक्रमा लगाई थी। आज भी उनकी याद में इसी परंपरा का निर्वहन किया जाता है। इस बार मुड़िया शोभायात्रा 27 जुलाई को राधा-श्याम सुंदर मंदिर व चैतन्य महाप्रभु मंदिर से अलग-अलग दो शोभायात्राएं सुबह व शाम निकाली जाएगी।