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बदहाली: महावन का पचावर गांव आज भी देख रहा विकास की राह, गंदा पानी पीने को मजबूर

सालों बीत जाने के बाद भी इस गांव में विकास तो क्या कोई भी जनप्रतिनिधि जीत जाने के बाद हालात को देखने नहीं आया।

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मथुरा

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Amit Sharma

Jan 13, 2020

बदहाली: महावन का पचावर गांव आज भी देख रहा विकास की राह, गंदा पानी पीने को मजबूर

बदहाली: महावन का पचावर गांव आज भी देख रहा विकास की राह, गंदा पानी पीने को मजबूर

मथुरा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के हर गांव को हाईटेक बनाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं लेकिन आज भी ऐसे गांव हैं जिनमें विकास तो क्या विकास के नाम पर एक ईंट भी नहीं लगी। आज भी इस गांव के वाशिंदे नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। सालों बीत जाने के बाद भी इस गांव में विकास तो क्या कोई भी जनप्रतिनिधि जीत जाने के बाद हालात को देखने नहीं आया।

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गंदे पानी से निकलने को मजबूर ग्रामीण

एक तरफ तो सरकार विकास की दुहाई देती है और दूसरी तरफ दुहाई देने वाली सरकार के दावे खोखले नजर आते हैं। थाना महावन क्षेत्र के गांव पचावर में आज भी यहां के वाशिंदे जिल्लत की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। गांव के रास्तों पर भरा हुआ गटर का गंदा पानी साफ-साफ बता रहा है कि गांव में लंबे अरसे से विकास कार्य नहीं हुए हैं। गटर के पानी से हर दिन लोगों को गुजरना पड़ता है और स्थानीय लोगों को बीमारी होने का भी भय बना हुआ है। गांव पचावर के रहने वाले सत्यपाल से जब गांव के हालातों के बारे में पूछा तो सत्यपाल ने बताया प्रधान जी से कई बार शिकायत की गई तो उन्होंने यह कह दिया कि आने वाली पंचवर्षीय योजना में देखेंगे। 20 साल इसी तरह से बीत गए गांव का हाल जस का तस बना हुआ है। गांव के प्रधान लगातार चार पंचवर्षीय योजनाओं से जीतते आ रहे हैं लेकिन गांव की समस्या पर उनका कोई ध्यान नहीं है।

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विकास नहीं तो वोट नहीं

स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है लगातार 20 साल से हम लोग एक ही व्यक्ति को प्रधान बनाते आ रहे हैं आज तक कोई विकास कार्य नहीं हुआ अब हम लोग विकास नहीं तो वोट नहीं की रणनीति बना रहे हैं।

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गंदा पानी बच्चों के लिए बीमारी

हर दिन इस गंदे पानी से बच्चे निकल कर जाते हैं और हमें यह डर लगा रहता है कि हमारे बच्चे बीमार न हो जाएं मजबूरी यही है कि रास्ता एक है और निकलना सबको है शिकायत भी की लेकिन समाधान नहीं हुआ।

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तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक लगाई चक्कर

पचावर निवासी सतीश और दिलीप ने बताया कई बार तहसील दिवस में भी हम लोग गए हैं वहां सुनवाई नहीं हुई तो हम जिला मुख्यालय भी गए डीएम साहब से मिलने वहां भी अपनी परेशानी अधिकारियों के समक्ष रखी लेकिन किसी ने आज तक नहीं सुनी।