इसी का दुखड़ा लेकर किसान जिलाधिकारी के पास पहुंचे। किसानों ने जिलाधिकारी को बताया कि उनके यहां धान की खेती बहुतायत में होती है। धान की फसल नाजुक है। इससे किसान को कई बार बडा घाटा उठाना पडता है। रजवाह में पानी नहीं आने या बरसात नहीं होने से धान लगाने वाले किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच जाते हैं। ऐसे धान की फसल का बीमा होना जरूरी है। अधिकारियों ने क्षेत्र में बाजरे की खेती को बीमा फसल की सूची में लिखा है जबकि बाजरे की खेती क्षेत्र में नाममात्र को होती है। बाजरे की फसल इतनी जल्द खराब भी नहीं होती है और बाजरे की बुआई में ज्यादा खर्चा भी नहीं आता है। कुछ नहीं होने पर भी किसान को पशुओं के लिए चारा तो मिल ही जाता है लेकिन धान में ऐसा कुछ नहीं होता, किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।