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Mau Breaking: अब्बास अंसारी मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के रवैए पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, अब्बास अंसारी को दी बड़ी राहत

लखनऊ में अब्बास अंसारी जमीन पर राज्य सरकार के गरीबों के लिए आवास बनवाने की योजना पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए यथास्थिति को बरकरार रखा है। इसके साथ ही उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई में तेजी लाने का आदेश भी दिया है।

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मऊ

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Abhishek Singh

Jan 09, 2025

Supreme Court

Supreme Court

Abbas Ansari: गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। लखनऊ में उनकी जमीन पर राज्य सरकार के गरीबों के लिए आवास बनवाने की योजना पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए यथास्थिति को बरकरार रखा है। इसके साथ ही उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई में तेजी लाने का आदेश भी दिया है।


लखनऊ में डालीबाग के पास विकास प्राधिकरण ने मुख्तार अंसारी की जमीन को अवैध मानते हुए बुलडोजर चला दिया था। यह जमीन कथित तौर पर मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के नाम पर है। इस जमीन पर यूपी सरकार की पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए आवास बनाया जाना है। हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई नहीं होने पर अब्बास अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

जानिए जमीन विवाद का पूरा प्रकरण

आपको बता दें कि यह मामला अब्बास अंसारी और उनके भाई उमर अंसारी को वसीयत किए गए एक प्लॉट से संबंधित है, जिसे 2023 में प्लॉट को निष्क्रांत संपत्ति घोषित किए जाने के बाद उन्हें बेदखल कर दिया गया था। शुरुआत में अंसारी बंधुओं ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया, लेकिन जब अंतरिम रोक नहीं लगी और अधिकारियों ने कथित तौर पर विवादित स्थल पर निर्माण शुरू कर दिया, तो उन्होंने 2024 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अंसारी की एसएलपी का अक्टूबर 2024 में निपटारा कर दिया गया। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा था यदि आवश्यक हो तो उच्‍च न्‍यायालय में उनके मामले की सुनवाई बिना बारी के की जाए और किसी भी स्थिति में 11 नवंबर, 2024 को की जाए। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रवैए पर भी चिंता व्यक्त की है।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने अब्बास अंसारी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल की इस दलील पर गौर किया कि जमीन पर कब्जे से संबंधित याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष बार-बार सूचीबद्ध किया गया, लेकिन कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई। पिछले साल 21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से अंतरिम रोक संबंधी आवेदन पर जल्द से जल्द सुनवाई करने को कहा था। गुरुवार को जब मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आया तो कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि उसके आदेश के बावजूद मामले पर सुनवाई नहीं हुई है।

बेंच ने कहा, 'कुछ उच्च न्यायालयों के बारे में हम कुछ नहीं कह सकते, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट उन उच्च न्यायालयों में से एक है, जिसके बारे में चिंतित होना चाहिए। ’ निर्माण स्थल पर यथास्थिति बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाईकोर्ट को मामले की शीघ्र सुनवाई करने का निर्देश दिया।