
उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात छठ पूजा का महापर्व अब समाप्त हो गया है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में चलने वाले इस पर्व की अलग ही महत्ता है।
दीपावली के बाद से ही छठ पूजा की गहमा गहमी शुरू हो गई थी। घाट सजाए जाने लगे थे। नदियों की साफ सफाई भी शुरू हो गई थी। इसके साथ ही जिले के आला अधिकारी घाटों पर घूम घूम कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे और विभिन्न प्रकार के निर्देशों को जारी कर रहे थे।
नदियों और घाटों के किनारे किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए गोताखोरों को लगाया गया था। साथ ही शहर में वाहनों का प्रवेश वर्जित था।
पहले दिन ’नहाय खाय,’ दूसरे दिन “खरना ’और तीसरे दिन मुख्य पर्व के बाद चौथे दिन इस व्रत का समापन होता है।
लोक आस्था के इस महापर्व में स्थानीय लोग एक दूसरे के सहयोग से पूजा की तैयारी करते हैं,सांझी संस्कृति का इससे बड़ा उदाहरण शायद ही कोई हो।
आज मऊ में 6 बज कर 9 मिनट पर सूर्योदय होना था परंतु बादल के कारण सूर्य ने व्रतियों से काफी आंख मिचौली खेली और लगभग पौने सात बजे दर्शन दिए।
Updated on:
08 Nov 2024 06:46 pm
Published on:
08 Nov 2024 09:42 am
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