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Exclusive: 1 जनवरी से बनने बंद हो जाएंगे 20 कैरेट सोने के आभूषण

Highlights- मेरठ सहित देश के ज्वेलरी बाजार को तगड़ा झटका- केवल तीन श्रेणियों 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट में स्वर्ण आभूषण की होगी हॉलमार्किंग- सोने के गहनों के लिए हॉल मार्किंग को अनिवार्य बनाने की योजना

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मेरठ

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lokesh verma

Dec 12, 2019

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केपी त्रिपाठी/मेरठ. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय देश में बिकने वाले सोने (Gold) के गहनों के लिए हॉल मार्किंग (Hallmarking) को अनिवार्य बनाने की योजना बना रहा है। इसके तहत वर्ष 2017 में हाॅलमार्क लिस्ट से 20 कैरेट के गोल्ड (20 carat gold jewellery) को हटा दिया गया था। इसके बाद जब विरोध शुरू हुआ तो सरकार ने यह कहते हुए मोहलत दी कि जिसके पास स्टाक बचा है, वह निकाल दें। अब सरकार आगामी 1 जनवरी 2020 से 20 कैरेट गोल्ड के आभूषणों (Gold Jewellery) की बिक्री पर पूर्णता पाबंदी लगाने की बात कही है। अब हॉलमार्किंग केवल तीन श्रेणियों 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट में स्वर्ण आभूषण के लिए की जाएगी। इस हॉलमार्किंग की सूची में 20 कैरेट ग्रेड के आभूषणों को शामिल नहीं किया गया है। जबकि सर्वाधिक आभूषण इसी 20 कैरेट गोल्ड मिश्र धातु, दस्तकारी आभूषण के लिए मिश्रित धातु के अनुपात में बनता है।

यूनाइटेड ज्वैलर्स एंड मैन्यूफक्चरर्स फैडरेशन के अध्यक्ष डाॅ. संजीव अग्रवाल के मुताबिक ज्वेलरी क्राफ्टिंग के लिए 20 कैरेट सबसे अच्छा ग्रेड है, क्योंकि यह न तो 14 और 18 ग्रेड के समान कठिन है और न ही 22 कैरेट के रूप में बहुत नरम। यह केवल विदेशों में उपलब्ध उच्च तकनीक का उपयोग करके तैयार किया जा सकता है। जबकि उत्तर भारत के विशेष रूप से शिल्पकारों ने अपने फॉरएथर्स से गोल्ड ज्वैलरी हैंडक्राफ्ट की कला विरासत में ली है और इसे 20 कैरेट सोने के मिश्र धातु का उपयोग करके विकसित किया है। इसमें गोल्ड की 833 (84%) शुद्धता होती है।

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इन राज्यों में बनाए जाते हैं 20 कैरेट गोल्ड के आभूषण

अधिकांश भारतीय आभूषण कारीगरों (जैसा कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर आदि में हैं) आभूषणों को हस्तनिर्मित करने और अपनी रोटी कमाने के लिए इस 20 कैरेट मिश्र धातु का उपयोग करते हैं, लेकिन अब सरकार द्वारा इसे बंद कर देने से यह ज्वैलरी कारीगरों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण और अनैतिक व्यवहार करना अनुचित है।

बेरोजगार हो जाएंगे करोड़ों शिल्पकार

हॉलमार्किंग सूची से 20 कैरेट को हटाने से करोड़ों कारीगर बेरोजगार हो जाएंगे। यह कहा जाता है कि हॉलमार्किंग केवल सोने के लेख का एक गुणवत्ता प्रमाणन है। शुद्धता के लिए प्रमाणित होने से पहले सोने के गहनों का परीक्षण एक परख और हॉलमार्किंग केंद्र में किया जाता है। डाॅ. संजीव अग्रवाल का कहना है कि 20 कैरेट गोल्ड को हटाना पूरी तरह से निराधार है।

इस कारण अधिक खरीदे जाते हैं 20 कैरेट सोने का आभूषण

डाॅ. संजीव अग्रवाल बताते हैं कि 20 कैरेट सोने का आभूषण मजबूत और टिकाऊ होने के साथ ही दाम में भी लोगों की जेब के मुताबिक पड़ता था। उन्होंने बताया कि 20 कैरेट के गोल्ड में चूंकि अन्य धातुओं की मिलावट करने के बाद उससे बने आभूषण अधिक चलते हैं जिसके कारण लोग इन्हें लेना पसंद करते हैं। वहीं 18 और 24 कैरेट के गोल्ड के दामों से 20 कैरेट गोल्ड के आभूषण से बने के दाम कम होते हैं। उन्होंने बताया कि 20 कैरेट गोल्ड से बने आभूषण कारीगर द्वारा ही बनाए जा सकते हैं। जबकि अन्य कैरेट गोल्ड से बने आभूषण अधिकांशता मशीनों से बने हुए होते हैं।

बंद होने से टूट जाएगी शिल्पकारों की कमर

मेरठ में सोने का बड़ा कारोबार होता है। मेरठ स्वर्ण बाजार एशिया के बड़े बाजारों में शुमार है। यहां के बनाए आभूषण विदेश तक में सप्लाई किए जाते हैं। जिसमें अधिकांश आभूषण 20 कैरेट गोल्ड के होते हैं। अगर 20 कैरेट गोल्ड का आभूषण बंद हुआ तो सोने से आभूषण बनाने वाले कारीगर और यहां का स्वर्ण व्यापारी भूखमरी के कगार पर आ जाएगा।

बड़ी कंपनियों के इशारे पर काम कर रही सरकार

स्वर्णकारों का कहना है कि 20 कैरेट गोल्ड से बने आभूषणों को हाॅलमार्क न करने का फैसला सरकार बड़ी कंपनियों के इशारे लिया है। उन्होंने बताया कि सरकार नहीं चाहती कि सोने के छोटे कारोबारी अपना काम कर सकें। आभूषण बनाने वाली बड़ी कंपनियों को देश के सोने के कारीगर और व्यापारी कड़ी टक्कर दे रहे हैं, जिसके चलते वे अपनी मनमानी नहीं कर पा रही हैं। 20 कैरेट गोल्ड के आभूषण बंद हो जाने से लोगों की मजबूरी होगी।

लड़ेंगे हक के लिए लंबी लड़ाई

डाॅ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि इसके लिए वह लंबी लड़ाई लड़ेंगे। मेरठ सर्राफा बाजार का सभी स्वर्ण कारीगर सरकार के इस फैसले के विरोध में एक हो गया है। अब सरकार से सड़क पर इसकी आर-पार की लड़ाई होगी।