
मेरठ। मेरठ में 1857 की क्रांति (Revolution) के स्थल और अपने पूर्वजों (Ancestors) की कब्र देखने ब्रिटेन (British) से आए अंग्रेजों ने क्रांति के बारे में जाना। इन्होंने सबसे पहले राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय देखा। शहीद स्मारक पर पुष्प चढ़ाए। सेंट जोंस चर्च (Saint Johns Church) और सिमेट्री (Cemetery ) में कब्रों पर गए और अपने पूर्वजों को नमन किया।
मेरठ में 1857 की क्रांति के उद्गम स्थल और अपने पूर्वजों के कब्र को देखने इंग्लैंड से टूरिस्ट बुधवार को पहुंचा। चार लोगों का यह प्रतिनिधिमंडल सबसे दिल्ली रोड राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय पहुंचा। जहां उन्होंने संग्रहालय की गैलरी को देखा। 10 मई 1857 की क्रांति और उससे जुड़ी घटनाओं के बारे में जानकारी ली। शहीद स्मारक पर विदेशी पर्यटकों ने पुष्प भी चढ़ाए। राजकीय संग्रहालय में लगाए चित्रों की फोटोग्राफी की। दरअसल, 1857 में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यहां ब्रिटिश अफसरों की मेरठ और आसपास तैनाती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई ब्रिटिश अफसर मारे गए थे। उनकी कब्र सेंट जोंस सिमेट्री में हैं। हर साल उनके पूर्वज कब्र पर नमन करने के लिए आते हैं।
इन चारों ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बारे में जानकारी हासिल की, उस दौरान इनके पूर्वज मेरठ में ही थे। इसके बाद चारों टूरिस्ट सेंट जोंस चर्च और सिमेट्री पहुंचे। इंग्लैंड से आए टूरिस्टों में गिल पर्सन ने बताया के सेंट जोंस चर्च और सिमेट्री के बारे में वे पहले से जानते हैं। सेंट जोंस सिमेट्री में बहुत से ब्रिटिश लोगों की कब्र हैं। जिसमें इन टूरिस्ट के कुछ पूर्वज भी हैं। जिसकी वजह से सिमेट्री में आना उनके लिए बहुत मायने रखता है। इंग्लैंड से आए पर्यटकों ने शहर के अन्य स्थलों को भी देखा और फोटोग्राफी करने के साथ जानकारी हासिल की। पर्यटकों में गिल पर्सन के साथ रिस गोप, एंड्रू लेक्ट, रेव निकर भी शामिल रहे।
Published on:
16 Jan 2020 04:01 pm

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