
पूर्व सांसद हाजी शाहिद अखलाक और पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी
निकाय चुनाव 2022 में भले कुछ मुस्लिम राजनीति चेहरे दिखाई दें। लेकिन मेरठ नगर निगम की राजनीति में दो मुस्लिम परिवारों का हमेशा से दबदबा रहा है। इनमें एक अखलाक परिवार और दूसरा याकूब परिवार है। दोनों ही परिवार का अपना पुराना राजनैतिक रसूख रहा है।
निगम की राजनीति से पहुंचे बुलंदी पर
सबसे पहले बात अखलाक परिवार से शुरू की जाए। अखलाक परिवार में राजनीति की शुरुआत करने वाले हाजी अखलाक थे। जो कभी मेरठ पालिका के चुनाव में मुख्य भूमिका निभाते थे।
उसके बाद समाजवादी पार्टी से मेरठ शहर के विधायक बन गए। हाजी अखलाक के विधायक बनने के बाद परिवार का दबदबा मेरठ की मुस्लिम राजनीति में बढ़ा तो बेटा शाहिद अखलाक मेरठ के सांसद और मेयर भी बने। आज भी इस परिवार का मेरठ की मुस्लिम राजनीति में बराबर का दखल रहा है।
हाजी याकूब कुरैशी परिवार
अखलाक परिवार के बाद जिस दूसरे मुस्लिम परिवार की बात की जा रही है। उनमें हाजी याकूब कुरैशी का नाम आता है। हाजी याकूब कुरैशी के बड़े भाई हाजी युसूफ कुरैशी कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं।
बड़े भाई युसूफ कुरैशी के पदचिन्ह पर चलकर याकूब कुरैशी ने भी सियासत के गलियारे में कदम रखा। इसके बाद तो याकूब कुरैशी आगे बढ़ते चले गए। याकूब कुरैशी ने बसपा का दामन थामा और विधायक के साथ मंत्री भी बने। आज याकूब कुरैशी अवैध मीट रखने के मामले में फरार चल रहे हैं।
चुनाव में होता रहा हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण
मेरठ में चुनाव कोई भी हो हर बार हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण होता रहा है। इस ध्रुवीकरण में उसी के हाथ बाजी लगी तो मुस्लिम वोट बटोरने में पूरी तरह से कामयाब हो पाया। मेरठ में इस बार भी निकाय चुनाव को लेकर सियासत गरम होने वाली है। इस बार भी मुस्लिम सियासत बदली दिखाई दे रही है।
मुस्लिम राजनीति के केंद्र
मेरठ के इन दो मुस्लिम खानदानों के सामने सियासी दल नतमस्तक होते रहे हैं। यही कारण है कि बीएसपी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और मेरठ के पूर्व सांसद और मेयर शाहिद अखलाक का घर मुस्लिम राजनीति के केंद्र में रहता है। मेरठ में करीब 6 लाख मुस्लिम मतदाता हैं।
Published on:
21 Dec 2022 07:53 am
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