24 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भाजपा कार्यसमिति की बैठक में होनी थी सरकार के नए चेहरों की घोषणा, इस अहम वजह से खिसका दी गर्इ

बैठक में हर मुद्दे पर हुर्इ चर्चा, अहम फैसले टलने पर खलबली

2 min read
Google source verification
meerut

भाजपा कार्यसमिति की बैठक में होनी थी सरकार के नए चेहरों की घोषणा, इस अहम वजह से खिसका दी गर्इ

केपी त्रिपाठी, मेरठ। मेरठ में दो दिवसीय भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में कर्इ अहम फैसलों की घोषणा होनी थी, लेकिन हार्इकमान यहां किसी नर्इ घोषणा से बचता नजर आया। इसके पीछे अहम वजह थी। हालांकि इस पर कोर्इ कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन परिस्थितियों को देखकर इन अहम फैसलों को खिसका दिया गया है। इससे पार्टी के कुछ दिग्गजों को निराशा हुर्इ।

यह भी पढ़ेंः राजनाथ सिंह ने कहा- 2019 चुनाव की जीत का हाइवे उत्तर प्रदेश से होकर ही जाता है, इसलिए तैयार रहिए

2019 के मद्देनजर लटक गए बड़े फैसले

कार्यसमिति की बैठक से पहले माना जा रहा था प्रदेश में मंत्रिमंडल और उसके बाद जिलास्तर संगठन में बदलाव हाेंगे, लेकिन अब यह 2019 के चुनाव तक टाल दिए गए हैं। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के महत्व को देखते हुए अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति और योगी सरकार के कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी है।

यह भी पढ़ेंः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दलितों को लेकर दिया बड़ा बयान, विपक्ष को जमकर लताड़ा

ताकि खार्इ आैर गहरी नहीं हो

कार्यसमिति की बैठक से पहले चर्चा थी कि प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मंत्रिमंडल के नए चेहरों आैर जिलास्तर संगठनों की घोेषणा होनी है, लेकिन भाजपा के पुराने नेताओं की मानें तो प्रदेश की इस कार्यसमिति की बैठक का उद्देश्य कार्यकर्ताओं, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के बीच गहरी हो रही खाई को भरना था। अगले साल चुनाव भी होने हैं, तो इस बैठक में इन घोषणाआें को खिसकाना ही बेहतर समझा गया। अगर ये घोषणा हो जाती तो यह खार्इ आैर गहरी होने का खतरा था।

उपचुनाव में हार के थे ये कारण

उपचुनाव में मिली पराजयों पर मंथन करने के बाद यह माना जा रहा था कि गठबंधन और वोटों के ध्रुवीकरण के चलते ऐसा हुआ है, लेकिन भाजपा के चिंतक और रणनीतिकार को पार्टी की आंतरिक छानबीन में हार के कारण दूसरे ही निकलकर सामने आए। उपचुनाव में जातीय समीकरणों से अधिक नुकसान भाजपा को पदाधिकारियों के कामकाज के तरीके, कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल की कमी और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा ने पहुंचाया।

मिशन 2019 को लेकर राजनाथ ने गिनार्इ एक-एक उपलब्धि, सेना को लेकर दिया यह बड़ा बयान

कैराना में हारी मृगांका सिंह के बयान से होती है पुष्टि

कभी पश्चिम उप्र में भाजपा का चेहरा माने जाने वाले दिग्गज बाबू हुकुम सिंह की मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र कैराना में तूती बोलती थी। उनकी मृत्यु के बाद उपचुनाव में उनकी पुत्री मृगांका सिंह भाजपा प्रत्याशी रहीं। चुनाव हारने के बाद और उस हार की समीक्षा करने के बाद मृगांका सिंह ने कहा था कि सहारनपुर जिले की दोनों विधानसभा सीटों में भाजपा के पिछड़ने की असली वजह प्रशासन का भाजपा के विरोध में उतरना था। सहारनपुर के भाजपा जिला अध्यक्ष बिजेंद्र कश्यप ने इसे स्वीकार किया था कि कार्यकर्ताओं की कोई सुनवाई नहीं। अधिकारियों द्वारा कार्यकर्ताओं को अपमानित किया जाता है। इस आरोप की पुष्टि इस बात से भी हुई उपचुनाव में हार के बाद ही सरकार ने सहारनपुर के डीएम का तबादला कर दिया था। इसी तरह शामली जिले की तीन सीटों पर भी भाजपा रणनीतिकारों की योजना के नतीजे उल्टे ही रहे, जबकि कैराना विधानसभा सीट पर पार्टी को बढ़त की उम्मीद नहीं थी, लेकिन इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार 13 हजार वोटों से आगे रही। सोचिये जहां पर भाजपा के विधायक थे वहां से मृगांका चुनाव हारी, लेकिन कैराना जैसे मुस्लिम बाहुल्य वाले इलाके में वे 13 हजार वोटों से आगे रही थी।

बड़ी खबरें

View All

मेरठ

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग