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पिता के पास नहीं थे डेढ़ लाख का भाला दिलाने केे पैसे, फिर भी अन्नू ने रचा इतिहास, जानें कैसे गांव से पहुंची ओलंपिक तक

अन्नू रानी ने बहादरपुर गांव की चकरोड और दबथुआ कॉलेज में अभ्यास करके पाई सफलता

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मेरठ

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lokesh verma

Jul 01, 2021

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ. किसान अमरपाल सिंह के घर 28 अगस्त 1992 को जन्मीं अन्नू रानी पांच बहन-भाइयों में सबसे छोटी है। अमरपाल सिंह ने बताया उनका भतीजा लाल बहादुर और बेटा उपेंद्र अच्छे धावक रहे हैं। वह खुद शॉटपुट खिलाड़ी रह चुके हैं। पिता की प्रेरणा से अन्नू रानी ने खेल के मैदान पर कदम रखा। वह गांव की चकरोड और दबथुआ कॉलेज में अभ्यास करती थी। शुरुआत में भाला फेंक के साथ गोला फेंक और चक्का फेंक में अभ्यास करती थी। अब मेरठ की ये बेटी टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंकती नजर आएगी।

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25 सौ रुपये में दिलाया पहला भाला

अमरपाल सिंह बताते हैं कि वह डेढ़ लाख रुपये का भाला दिलाने में असमर्थ थे। अन्नू को पहला भाला 25 सौ रुपये में दिलाया था। अन्नू गांव की चकरोड और दबथुआ कॉलेज में अभ्यास करती थी। मेरठ की एटीई निदेशक आदर्श आनंद ने भाले स्पांसर किए, जिसके बाद अन्नू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कामयाबी हासिल की। माता मुन्नी देवी ने अन्नू का चयन टोक्यो ओलंपिक में होने पर खुशी जताई। वहीं, पिता ने कहा है कि उनकी बेटी ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेगी।

ओलंपिक क्वालीफाई मुकाबले में चूकने के बाद भी चयन

बहादरपुर गांव की चकरोड से निकलकर अन्नू रानी अब टोक्यो ओलंपिक के लिए रवाना होंगी। 12 साल के खेल करियर में आर्थिक समस्याओं को दरकिनार कर अन्नू ने लाजवाब प्रदर्शन किया। हाल ही में 63.24 मीटर भाला फेंककर नेशनल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। जहां वह मात्र .77 मीटर से ओलंपिक क्वालीफाई करने से चूक गई थी, लेकिन वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर ओलंपिक में शामिल होने का गौरव हासिल हुआ।

दुनिया की सबसे छोटे कद की खिलाड़ी हैं अन्नू

अन्नू रानी ने बताया कि वह भाला फेंक में दुनिया की सबसे छोटे कद की खिलाड़ी हैं। इसके बावजूद वर्ल्ड चैंपियनशिप में चेक रिपब्लिक की ओलंपियन खिलाड़ी बाराबोरा को हराया, जिसका कद छह फिट दो इंच था। इसके अलावा अन्य देशों की भाला फेंक खिलाड़ियों का कद छह फिट या उससे ऊपर है।

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