
मेरठ। कैंट बोर्ड की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। गुरुवार को हुए चुनाव में विपिन सोढ़ी उपाध्यक्ष पद पर विजयी हुए। सदस्यों ने उन्हें सर्वसम्मति से अपना उपाध्यक्ष चुना है।
चार साल से उपाध्यक्ष थीं बीना वाधवा
दरअसल, पिछले चार साल से उपाध्यक्ष रहीं बीना वाधवा के खिलाफ अन्य सात सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। सदस्यों द्वारा आपात बोर्ड बैठक बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव के क्रियावन की मांग सीईओ प्रसाद चव्हाण के सम्मुख की गई थी। इसके बाद में अध्यक्ष ने 25 जुलाई को शाम को 4 बजे बोर्ड बैठक बुलाई थी। इसमें अविश्वास प्रस्ताव की मांग की गई थी। गुरुवार को विपिन सोढ़ी, रिनी जैन, नीरज राठौर, अनिल जैन, मंजू गोयल, धर्मेंद्र सोनकर और बुशरा कमाल के वोटों के बल पर भाजपा उम्मीदवार विपिन सोढ़ी कैंट बोर्ड के नए उपाध्यक्ष पद पर काबिज हो गए।
निर्दलीय है एक सदस्य
कैंट बोर्ड के बदले समीकरणों के हिसाब से आठ में से 6 सदस्य भाजपा के हैं जबकि एक सदस्य निर्दलीय है। अभी तक उपाध्यक्ष बीना वाधवा थीं। उन्हें क्षेत्र में बसपाई चेहरे के रूप में जाना जाता था। उनके पति पूर्व उपाध्यक्ष सुनील वाधवा दो बार बसपा से कैंट विधानसभा से विधायक का चुनाव लड़ चुके थे।
भाजपा नेता ने कहा यह
भाजपा छावनी मंडल अध्यक्ष अंकित सिंघल का कहना है कि भाजपा के सदस्य ज्यादा होने पर भी कार्यकर्ता उपेक्षित महसूस कर रहे थे। अतः कार्यकर्ताओं की भावना से पार्टी के बड़े पदाधिकारियों को अवगत करवाया गया और पार्टी द्वारा संज्ञान लेते हुए अपना उपाध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई। वार्ड दो की सदस्य बुशरा कमाल ने भी भाजपा सदस्यों द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया। इस वजह से उपाध्यक्ष बीना वाधवा फिलहाल अकेली पड़ गईं।
Published on:
02 Aug 2019 04:20 pm
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