
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ.कोरोना की दूसरी लहर जहां अब काफी हद तक काबू में आ चुकी है। वहीं फंगस का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जिले में पहले ब्लैक फंगस ही कहर बरपा रहा था। उसके बाद येलो फंगस (Yellow Fungus) मिला, लेकिन अब एक ही मरीज में ब्लैक और येलो के अलावा सफेद फंगस (Black White and Yellow Fungus) के लक्षण मिलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। देश में गाजियाबाद (Ghaziabad) के बाद मेरठ (Meerut) में यह इस तरह का दूसरा केस है, जिसमें तीनों फंगस के लक्षण पाए गए हैं। मरीज के सेंपल को विशेष जांच के लिए लैब भेज दिया गया है।
दरअसल, मरीज का इलाज एक प्राइवेट अस्पताल में चल रहा है। इलाज करने वाले चिकित्सक ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन किया जा चुका है। मरीज में ब्लैक और पीले फंगस की पुष्टि पहले हुई थी, लेकिन अब उसमें सफेद फंगस के लक्षण भी मिले हैं। इसकी जांच रिपोर्ट का इंतजार है। चिकित्सकों के मुताबिक तीनों फंगस की वजह रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना ही है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर फंगस का खतरा
डाॅ. राहुल भार्गव के अनुसार, म्यूकरमाइकोसिस वातावरण में रहता है। यह मुंह या श्वास नली से शरीर के किसी भी हिस्से में पहुंच सकता है। एक साथ दोनों फंगस का संक्रमण होने से स्वस्थ होने में कोई परेशानी नहीं है। सफेद फंगस तो सामान्य दवा से ही ठीक हो जाता है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी कैंडिडा नाम के फंगस से होती है। यह उन लोगों में होती है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इनमें टीबी, एचआइवी और डायबिटीज के मरीज शामिल हैं।
पीला फंगस ज्यादा खतरनाक
बता दें कि इससे पहले मेडिकल कॉलेज में पीले फंगस का एक मरीज मिला था। डॉक्टरों के मुताबिक पीला फंगस, काले और सफेद फंगस से ज्यादा खतरनाक है। पीला फंगस जैसे बढ़ता है, बीमारी और घातक हो जाती है। अगर घर के अंदर ज्यादा नमी है तो मरीज के लिए यह घातक हो सकता है।
Published on:
03 Jun 2021 12:40 pm
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