
मेरठ। 8346 करोड़ की लागत से बने मेरठ—दिल्ली एक्सप्रेसवे (Delhi Meerut Expressway) की गुणवत्ता की कलई मानसून की बारिश में खुल गई। 90 किमी लंबे हाइवे पर जगह—जगह मिट्टी बह गई है। वहीं हर कुछ दूरी पर सड़क भी धंस गई है। ये हाल उस एक्सप्रेसवे का है जिसका उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करना है। यह एक्सप्रेसवे केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार है। वहीं इस बारे में एनएचएआई के अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। मेरठ—दिल्ली एक्सप्रेस वे पर जगह—जगह सड़क की हालत जर्जर हो चुकी है। मेरठ से लेकर दिल्ली तक बीच—बीच में कहीं मिट्टी बही तो कहीं सड़क उखड गई है या फिर धंस गई है।
आलम यह है कि बारिश में पानी के बहाव के दबाव में नालियां भी टूट गई हैं। एक्सप्रेस-वे बनाई गई ज्यादातर सीमेंटेड नालियां मिट्टी दरकने से बह गई हैं। आधुनिकता का बेजोड़ नमूना कहे जाने वाले इस एक्प्रेस वे पर तमाम खामियां इस बारिश में सामने आ चुकी हैं। हाईटेक मशीनों से तैयार किए गए एक्सप्रेव वे की गुणवत्ता पर मानसून की बारिश ने सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल देखरेख करने वाली कंपनी जीआर इन्फ्रा के कर्मचारी अब एक्सप्रेव वे को दुरुस्त करने में लगे हैं। जिससे एक्सप्रेस-वे को और ज्यादा नुकसान न हो। परतापुर स्थित टोल प्लाजा के नजदीक दो जगह पर सड़क की एक लेन तो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। दोनों जगहों पर कई मीटर लंबी सड़क करीब पांच फीट नीचे तक धंस गई है। इससे एक्सप्रेस वे किनारे निकल रहे तार भी टूट गए हैं। रेलिंग क्षतिग्रस्त हो गई है। दरअसल, इन दोनों जगहों पर बारिश का पानी भर गया था। इस वजह से हाईवे किनारे की मिट्टी दरकती चली गई और फिर सड़क भी धंस गई।
एक्सप्रेस वे के किनारे की धंसी मिटटी को जेसीबी से भरा जा रहा है। एक्सप्रेव वे पर सड़क और नालियों के टूटने का कारण नीचे जमीन का खोखला होना बताया जा रहा है। नीचे की जमीन खाली होने से सड़क भी इसी कारण से धंस गई। मिट्टी एक बार जगह बना ले तो आगे फिर दिक्कत नहीं होती। कुछ ऐसा ही हाल दुहाई के पास भी है। इस एक्सप्रेव पर हर थोड़ी दूर पर पांच से सात फीट तक मिटटी और सड़क धंसी हुई साफ देखी जा सकती है। इन स्थानों को बैरीकेड्स किया गया है, ताकि कोई हादसा न हो।
Published on:
11 Aug 2021 12:15 pm
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